लखनऊ की अदालत में मारपीट प्रकरण : उच्च न्यायालय ने पुलिस के खुफिया विभाग को गोपनीय जांच सौंपी

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लखनऊ की अदालत में मारपीट प्रकरण : उच्च न्यायालय ने पुलिस के खुफिया विभाग को गोपनीय जांच सौंपी

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  • Publish Date - September 3, 2026 / 10:43 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 10:43 PM IST

लखनऊ, तीन सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने गत 21 जुलाई को अदालत परिसर में हुई मारपीट की घटना में शामिल वकीलों की पृष्ठभूमि और गतिविधियों की गोपनीय जांच उत्तर प्रदेश पुलिस के खुफिया विभाग को सौंप दी है।

इस घटना में दिल्ली से आए वकीलों और एक स्थानीय वादी के साथ लखनऊ जिला अदालत परिसर में मारपीट की गई थी।

यह जांच उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) की देखरेख में की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की गयी है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने अपने पिछले आदेश में बदलाव करते हुए यह नया आदेश दिया। पिछले आदेश में पीठ ने खुफिया ब्यूरो (आईबी) को आरोपी वकीलों के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया था।

बुधवार की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश हुए अपर सॉलिसिटर जनरल एस. बी. पांडेय ने कहा कि खुफिया ब्यूरो के काम और प्रकृति अलग हैं और अदालत के गत 28 जुलाई के आदेश में उल्लिखित जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है।

पीठ ने इस दलील को मानते हुए निर्देश दिया कि गोपनीय जांच उत्तर प्रदेश पुलिस का खुफिया विभाग करे। यह भी निर्देश दिया गया कि महानिदेशक (अभिसूचना) को कार्यवाही में एक पक्ष के तौर पर शामिल किया जाए।

पीठ ने अदालत में मौजूद शासकीय अधिवक्ता डॉक्टर वी. के. सिंह को यह भी निर्देश दिया कि वह महानिदेशक (अभिसूचना) को इस आदेश की जानकारी दें।

अदालत ने पहले निर्देश दिया था कि घटना में शामिल वकीलों से जुड़े हलफनामे और विवरण रिकॉर्ड पर रखे जाएं।

पीठ ने बुधवार की सुनवाई के दौरान यह पाया कि संबंधित वकीलों से मांगे गए शपथपत्र और जानकारियां अभी तक दाखिल नहीं की गई हैं। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।

पीठ ने पुलिस आयुक्त और पुलिस उपायुक्त द्वारा दाखिल दो जवाबी हलफनामों को भी रिकॉर्ड पर लिया।

इसी साल 21 जुलाई को दिल्ली से आए वकीलों और एक वादी के साथ लखनऊ जिला अदालत परिसर में कथित तौर पर मारपीट की गई थी। उच्च न्यायालय ने इस घटना का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की और आरोपों तथा कथित रूप से शामिल वकीलों की पृष्ठभूमि की विस्तृत जांच के निर्देश दिये।

भाषा सं. सलीम शफीक

शफीक