लखनऊ, 18 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत भूमि अधिग्रहण के आधार पर अयोध्या में प्रस्तावित एक होटल परियोजना को रोक दिया गया था। अदालत ने कहा कि निवेश को प्रोत्साहित करने वाली राज्य सरकार की नीतियों के तहत किए गए वादों और लिए गए निर्णयों का सरकारी विभागों को सम्मान करना चाहिए।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने आवास आयुक्त द्वारा 29 मई 2024 को पारित आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया।
अदालत ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर कानून के तहत संबंधित भूमि को अधिग्रहण से मुक्त करने के संबंध में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
मामला अयोध्या के कुड़ाकेशवपुर उपरहार गांव में स्थित 2,530 वर्ग मीटर भूमि से जुड़ा है। इस भूमि पर याचिकाकर्ता कल्पना निगम की होटल परियोजना ‘रामकुलम रेजीडेंसी’ प्रस्तावित थी। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने 17 जुलाई 2023 को होटल का नक्शा स्वीकृत किया था, जबकि आवास विकास परिषद ने भूमि अधिग्रहण संबंधी अधिसूचना 19 अगस्त 2023 को प्रकाशित की थी।
अदालत ने माना कि होटल का नक्शा स्वीकृत होने के बाद भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की गई और निर्माण प्रक्रिया भी उससे पहले शुरू हो चुकी थी।
पीठ ने कहा कि सरकारी विभागों को राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई नीतियों के तहत किए गए वादों और लिए गए निर्णयों का सम्मान करना चाहिए।
पीठ ने कहा कि ‘इन्वेस्ट यूपी’ की बैठकों में इस मुद्दे पर पहले ही विचार किया जा चुका है और यह निर्णय लिया गया था कि जिन होटल परियोजनाओं के नक्शे भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने से पहले स्वीकृत हो चुके हैं, उन्हें अधिग्रहण की प्रक्रिया से बाहर रखा जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि राज्य की निवेश नीतियां निवेशकों के बीच अपेक्षा पैदा करती हैं और सरकारी अधिकारी इन नीतियों की प्रतिबद्धताओं से मनमाने ढंग से पीछे नहीं हट सकते।
पीठ ने याचिकाकर्ता की इस दलील पर भी गौर किया कि परियोजना को राज्य के निवेश और पर्यटन प्रोत्साहन ढांचे के तहत विकसित किया जा रहा था और अधिकारियों ने शुरुआत में इस परियोजना को भूमि अधिग्रहण से छूट के लिए योग्य माना था।
अदालत ने इसके बाद आवास आयुक्त के 29 मई 2024 के आदेश को रद्द कर दिया और राज्य सरकार को उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद अधिनियम की धारा 49 के तहत मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
अदालत ने सरकार को संबंधित भूमि को अधिग्रहण से मुक्त करने के संबंध में छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का भी निर्देश दिया।
भाषा सं जफर खारी
खारी