गोरखपुर (उप्र), 22 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण संबंधी संशोधन विधेयक के विरोध को लेकर बुधवार को विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘‘कांग्रेस और सपा का तो इतिहास ही नारी-विरोध का रहा है’’।
उन्होंने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि संशोधन विधेयक पारित नहीं होने पर जश्न मनाने वालों के रहते महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन खतरे में है।
मुख्यमंत्री ने ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 फीसद आरक्षण दिलाने की पहल करते हुए संसद में संशोधन प्रस्ताव प्रस्तुत किया, लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी(सपा), तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने इसका विरोध किया और जब यह विधेयक पारित नहीं हो पाया तो इन दलों के सदस्य तालियां बजाते और ‘हंसते-नाचते’ हुए सदन से बाहर निकले।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘भाजपा ने तय किया है कि जो लोग आधी आबादी को मिलने वाले उनके जायज अधिकारों पर प्रहार करते हों, उनमें बाधा उत्पन्न करते हों, उन लोगों को सबक सिखाने की आवश्यकता है क्योंकि उनके रहते आधी आबादी की सुरक्षा, सम्मान और उनका स्वालंबन खतरे में है और इसके लिए जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं।’’
योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस को महिलाओं, दलितों और पिछड़ी जातियों की विरोधी बताते हुए कहा, ‘‘कांग्रेस और सपा का इतिहास ही नारी-विरोध का रहा है। कांग्रेस के इतिहास को कौन नहीं जानता। नारी को उसका अधिकार मिले, वंचितों, दलित और पिछड़ी जातियों को उनका हक मिले, इसमें कांग्रेस हमेशा बाधक रही। समाजवादी पार्टी तो घोषित रूप से नारी विरोधी है। उसके लिए तो नारा ही गूंजता था कि ‘देख सपाई बिटिया घबराई’।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाएं आज बिना रोक-टोक हर क्षेत्र में नेतृत्व दे रही हैं, लेकिन यह नेतृत्व और सशक्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर तथा विकसित भारत के लिए जरूरी है कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी भी मिले।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण अपने आप में एक सुधार है और यह समय की आवश्यकता के अनुरूप किए जाने वाले परिवर्तन का एक हिस्सा भी है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा की सरकार ने वर्ष 2014 के बाद से महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए सार्थक कदम उठाए हैं।
भाषा सलीम धीरज
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