अलीगढ़ में एएमयू-नगर निगम भूमि विवाद में डीएम ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया

अलीगढ़ में एएमयू-नगर निगम भूमि विवाद में डीएम ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया

अलीगढ़ में एएमयू-नगर निगम भूमि विवाद में डीएम ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया
Modified Date: August 22, 2026 / 03:05 pm IST
Published Date: August 22, 2026 3:05 pm IST

अलीगढ़ (उप्र), 22 अगस्त (भाषा) अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और नगर निगम के बीच भूमि के स्वामित्व को लेकर उठा विवाद जिलाधिकारी (डीएम) की ओर से यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिए जाने के बाद थम गया।

जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि चूंकि दोनों पक्ष सरकारी संस्थान हैं, इसलिए किसी भी तरह का टकराव उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि मामला कानून की उचित प्रक्रिया के तहत सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझना चाहिए।

कुमार ने कहा कि जब तक एसडीएम कोर्ट (उप जिलाधिकारी अदालत) में लंबित मामले पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक विवादित भूखंड विश्वविद्यालय के कब्जे में ही रहेगा।

अलीगढ़ में 3.8 एकड़ भूमि को लेकर विवाद बृहस्पतिवार को शुरू हुआ था, जब नगर निगम के अधिकारियों ने उस ज़मीन की घेराबंदी शुरू कर दी, जो एएमयू राइडिंग क्लब के मैदान का हिस्सा है।

एएमयू ने इस कार्रवाई को ‘जबरन कब्जा’ बताया, जबकि नगर निगम का दावा है कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि पिछले 40 वर्ष से उसकी है। यह विवाद उप जिलाधिकारी न्यायालय में लंबित है।

एएमयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार को जिलाधिकारी के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1923 में जारी मूल भू-स्वामित्व दस्तावेज और 1923 की राजपत्रित अधिसूचना पेश की।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने 1940 में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा जारी दस्तावेज भी पेश किए, जिसमें भूमि का आवंटन एएमयू को किए जाने का स्पष्ट उल्लेख है।

हालांकि, अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया कि 1992 में आधिकारिक भू-अभिलेखों में कथित तौर पर कुछ छेड़छाड़ हुई थी।

उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम की जानकारी न तो एएमयू प्रशासन को थी और न ही नगर पालिका के सक्षम प्राधिकारी को।

विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि इस कथित छेड़छाड़ के बारे में एएमयू प्रशासन को 2003 में पता चला था।

विज्ञप्ति में विश्वविद्यालय ने कहा कि एएमयू प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा उठाया, लेकिन मामला लंबित रहा।

विज्ञप्ति के अनुसार अंततः 29 मार्च 2025 को एएमयू ने एसडीएम कोर्ट में औपचारिक अपील दायर की, जो अभी विचाराधीन है।

नगर निगम के अधिकारी बृहस्पतिवार को उस भूखंड पर पहुंचे और एएमयू राइडिंग क्लब मैदान के हिस्से में बाड़ लगाने लगे।

एएमयू के एक अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘पूरी कार्रवाई चोरी-छिपे अंधेरे में की गई, जिससे निश्चित रूप से इस कदम की मंशा पर संदेह पैदा हुआ है।’

एएमयू के जनसंपर्क विभाग के पूर्व प्रमुख राहत अबरार ने पूरे विवाद पर कहा कि 19वीं सदी के अंतिम वर्षों से एएमयू को न केवल शहर की सीमा के भीतर, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी मात्रा में जमीन दान में मिली थी।

उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसी दान की गई जमीनों की कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये होगी।

अबरार ने कहा कि दुखद सच्चाई यह है कि पिछली करीब आधी सदी से एएमयू प्रशासन ने इस विरासत को सुरक्षित रखने के लिए बहुत कम काम किया है और एएमयू का संपत्ति विभाग लापरवाही व बदहाली का शिकार है।

भाषा सं आनन्द

रंजन जोहेब

जोहेब


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