भारत ने ऊष्ण लहर के दौरान शून्य जनहानि सुनिश्चित करने के लिए योजना तैयार की : शाह

भारत ने ऊष्ण लहर के दौरान शून्य जनहानि सुनिश्चित करने के लिए योजना तैयार की : शाह

भारत ने ऊष्ण लहर के दौरान शून्य जनहानि सुनिश्चित करने के लिए योजना तैयार की : शाह
Modified Date: May 14, 2026 / 12:03 pm IST
Published Date: May 14, 2026 12:03 pm IST

गाजियाबाद, 14 मई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनके मंत्रालय ने देश में अगले कुछ वर्षों में ऊष्ण लहर के दौरान यह सुनिश्चित करने के लिए योजना तैयार की है कि एक भी व्यक्ति की जान नहीं जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार का मूल सिद्धांत आपदाओं के प्रति ‘‘प्रतिक्रियात्मक’’ नहीं बल्कि ‘‘सक्रिय’’ या पूर्व तैयारी वाला दृष्टिकोण अपनाना है।

शाह ने यहां राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 8वीं बटालियन परिसर में बल को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान करने के बाद यह टिप्पणी की।

‘प्रेसिडेंट्स कलर’ किसी सैन्य या पुलिस इकाई को उसकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रदान किया जाता है।

यह सम्मान एनडीआरएफ को उसकी स्थापना के 20वें वर्ष में मिला है। इस बल का गठन 2006 में प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों के लिए एक संघीय आकस्मिक बल के रूप में किया गया था।

शाह ने कहा कि ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ केवल एनडीआरएफ की उत्कृष्ट सेवाओं की मान्यता नहीं है, बल्कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों, राज्य मशीनरी, एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर), एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना), ‘आपदा सेवा मित्रों’ (स्वयंसेवकों) और अन्य सभी सहयोगी संस्थाओं के कार्यों का भी सम्मान है।

उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ ने अपने अभियानों के जरिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों का ‘‘विश्वास और प्रशंसा’’ अर्जित की है।

गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य चक्रवात, भूकंप और बाढ़ जैसी त्रासदियों व आपदाओं के दौरान ‘‘शून्य जनहानि और न्यूनतम संपत्ति क्षति’’ सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने देश में ऊष्ण लहर की ‘‘गंभीर चुनौती’’ से बेहतर तरीके से निपटने के लिए एक योजना तैयार की है और आने वाले कुछ वर्षों में इस संदर्भ में ‘‘शून्य जनहानि’’ सुनिश्चित करने में सफलता मिलेगी।

शाह ने कहा, ‘‘आपदाओं के प्रति हमारी नीति और दृष्टिकोण केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय और पूर्व तैयारी पर आधारित रहा है।’’

उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन और संकट के समय ‘‘सबसे पहले मदद करने वाले देश’’ के रूप में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। साथ ही उन्होंने एनडीआरएफ से वैश्विक ताप वृद्धि और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए खुद को तैयार रखने का आह्वान किया।

एनडीआरएफ की देशभर में 16 परिचालन बटालियनें तैनात हैं और बल में करीब 18,000 कर्मी कार्यरत हैं।

कार्यक्रम के दौरान एनडीआरएफ के महानिदेशक पीयूष आनंद ने कहा कि बल ने अपनी स्थापना के बाद से अब तक 12,000 से अधिक अभियान चलाए हैं।

भाषा गोला वैभव

वैभव


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