लखनऊ: अतिक्रमण हटाए जाने में वकीलों के कथित व्यवधान पर अदालत नाराज

लखनऊ: अतिक्रमण हटाए जाने में वकीलों के कथित व्यवधान पर अदालत नाराज

लखनऊ: अतिक्रमण हटाए जाने में वकीलों के कथित व्यवधान पर अदालत नाराज
Modified Date: May 26, 2026 / 10:26 pm IST
Published Date: May 26, 2026 10:26 pm IST

लखनऊ, 26 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कैसरबाग स्थित पुराने उच्च न्यायालय परिसर के पास चकबस्त चौराहे पर अतिक्रमण हटाए जाने के दौरान वकीलों द्वारा कथित रूप से व्यवधान डाले जाने पर संज्ञान लिया है।

उच्च न्यायालय ने पहले पुराने उच्च न्यायालय परिसर के आसपास से अतिक्रमण हटाने के निर्देश नगर निगम को दिए थे।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने अतिक्रमण हटाने में बाधा पर गंभीर नाराजगी जताई और बाद में आदेश जारी करने की बात कही। यह आदेश मंगलवार को उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान खंडपीठ को बताया गया कि लखनऊ नगर निगम ने अदालत के पूर्व निर्देशों के अनुपालन में चकबस्त चौराहे पर स्वास्थ्य भवन के पास अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी।

नगर आयुक्त की ओर से अदालत में पेश पत्र के अनुसार, चिह्नित 72 अवैध अतिक्रमणों में से केवल 14 ही हटाए जा सके। शेष अतिक्रमण मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं द्वारा कथित व्यवधान और बाधा डालने के कारण नहीं हटाए जा सके।

नगर निगम ने अदालत को बताया कि अदालत के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने और अतिक्रमण रोधी अभियान जारी रखने के लिए प्रशासनिक और पुलिस सहायता मांगी गई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता एच.जी.एस. परिहार और आनंद मणि त्रिपाठी के साथ अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एस. चंद्रा मामले में अदालत की सहायता के लिए पीठ के समक्ष उपस्थित हुए।

मामले में अगली सुनवाई आठ जून को होगी।

भाषा सं आनन्द शोभना

शोभना


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