लखनऊ अग्निकांड: अदालत ने मुआवजे के लिए राज्य सरकार को स्पष्ट नीति बनाने के निर्देश दिए

लखनऊ अग्निकांड: अदालत ने मुआवजे के लिए राज्य सरकार को स्पष्ट नीति बनाने के निर्देश दिए

लखनऊ अग्निकांड: अदालत ने मुआवजे के लिए राज्य सरकार को स्पष्ट नीति बनाने के निर्देश दिए
Modified Date: September 14, 2026 / 11:35 pm IST
Published Date: September 14, 2026 11:35 pm IST

लखनऊ, 14 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अलीगंज अग्निकांड के पीड़ितों को मुआवजा देने के मामले में सोमवार को कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से इतर घटनाओं में राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे के लिए स्पष्ट नीति और मानदंड होने चाहिए।

पीठ ने कहा कि अलग-अलग घटनाओं में अलग-अलग राशि देने से भेदभाव और मनमानी की स्थिति पैदा हो सकती है।

पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह प्राकृतिक आपदाओं से इतर मामलों में मुआवजा देने के लिए नीति तैयार करने के पहलू पर विचार करे।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की पीठ ने शिवेन्दु पांडे की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। पीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि पीड़ित परिवारों को दी गई मुआवजा राशि पर्याप्त क्यों मानी जाए और उसे बढ़ाया क्यों न जाए।

सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि अलीगंज अग्निकांड में मृत प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को अलग-अलग स्रोतों से करीब 11 से 12 लाख रुपये की सहायता दी गई है। इसमें मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पांच लाख रुपये, राज्य आपदा मोचन निधि से चार लाख रुपये और प्रधानमंत्री राहत कोष से दो लाख रुपये शामिल हैं। हालांकि पीड़ित परिवारों की ओर से अदालत को बताया गया कि कुछ परिवारों को प्रधानमंत्री राहत कोष से मिलने वाले दो लाख रुपये अभी प्राप्त नहीं हुए हैं।

पीठ ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता वरुण पांडे से इस संबंध में तथ्यों का सत्यापन कराने को कहा है।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अपूर्व तिवारी ने उच्चतम न्यायालय के तीन फैसलों का हवाला देते हुए बताया कि जहां मुआवजे के लिए कोई स्पष्ट नीति या वैधानिक व्यवस्था नहीं होती, वहां मोटर दुर्घटना दावा मामलों में लागू सिद्धांतों को मुआवजा निर्धारित करने में आधार बनाया जा सकता है। इस पर पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के उक्त फैसलों में प्रतिपादित सिद्धांतों को भी ध्यान में रखे और शपथपत्र के माध्यम से बताए कि अब तक पीड़ित परिवारों को कितना मुआवजा दिया गया है।

सुनवाई में अग्निकांड में घायल 25 वर्षीय जयंत गुप्ता का मामला भी सामने आया। पीड़ित परिवार की ओर से बताया गया कि जयंत गंभीर रूप से घायल है और किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में उसका उपचार हो रहा है। उसके इलाज पर करीब 70 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहा है, जबकि उसे अब तक केवल 50 हजार रुपये मुआवजा मिला है।

जयंत की हालत पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने प्रथम दृष्टया कहा कि घटना के लिए केवल भवन मालिक की चूक ही नहीं, बल्कि संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है क्योंकि कथित रूप से भवन को अवैध तरीके से व्यावसायिक उपयोग में लाने की अनुमति दी गई। ऐसे में अदालत ने कहा कि कम से कम घायल जयंत के इलाज के बिल का भुगतान राज्य सरकार को करना चाहिए।

पीठ ने केजीएमयू को निर्देश दिया कि जयंत से उपचार का कोई शुल्क न लिया जाए। यदि उपचार पर कोई खर्च आता है तो उसे राज्य सरकार से मांगा जाए और राज्य सरकार उसका भुगतान सुनिश्चित करे।

सुनवाई के दौरान पीड़ितों की ओर से दायर हस्तक्षेप आवेदन में मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए अतिरिक्त मुआवजे की मांग की गई। अदालत ने याचिकाकर्ता को भवन मालिक को विपक्षी पक्षकार बनाने की अनुमति दी और उसे नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।

पीठ ने अपर महाधिवक्ता के पास सीलबंद लिफाफे में उपलब्ध मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को आवश्यकता पड़ने पर पेश करने को भी कहा है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून को तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में आग लगने के कारण कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए।

भाषा सं आनन्द गोला

गोला


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