लखनऊ के 88 गांवों में जल संकट पर उच्च न्यायालय सख्त, दिये निर्देश
लखनऊ के 88 गांवों में जल संकट पर उच्च न्यायालय सख्त, दिये निर्देश
लखनऊ, 25 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राजधानी के 88 गांवों में बढ़ते जल संकट का संज्ञान लेते हुए मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को ग्रामीणों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता बरतते हुए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि पानी जीवन की बुनियादी जरूरत है और इस संकट से निपटने के लिए दीर्घकालिक और तत्काल, दोनों स्तरों पर ठोस उपाय किए जाने की आवश्यकता है।
अदालत ने अधिकारियों को प्रस्तावित पांच जल शोधन संयंत्र लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा इस उद्देश्य के लिए चिह्नित 30 झीलों को पुनर्जीवित करने के संबंध में जल्द निर्णय लेने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने ‘उत्कर्ष लोक सेवा संस्थान’ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 88 गांवों में जल संकट के स्थायी समाधान के लिए पांच जल शोधन संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है। बख्शी का तालाब क्षेत्र के नगवामऊ गांव में एक संयंत्र के लिए जिलाधिकारी पहले ही जमीन आवंटित कर चुके हैं।
हालांकि, राज्य सरकार से प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी अभी मिलनी बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश जल निगम (शहरी) द्वारा संयंत्र का निर्माण किया जाएगा।
अदालत को यह भी बताया गया कि बाकी चार जल शोधन संयंत्र के लिए अभी तक जमीन आवंटित नहीं की गई है। इस पर अदालत ने जिलाधिकारी को प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
भाषा
सं, सलीम रवि कांत

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