मौलाना अरशद मदनी ने मुसलमानों से गैर-मुस्लिम पड़ोसियों के सुख-दुख में सहभागी बनने की अपील की

मौलाना अरशद मदनी ने मुसलमानों से गैर-मुस्लिम पड़ोसियों के सुख-दुख में सहभागी बनने की अपील की

मौलाना अरशद मदनी ने मुसलमानों से गैर-मुस्लिम पड़ोसियों के सुख-दुख में सहभागी बनने की अपील की
Modified Date: July 18, 2026 / 03:11 pm IST
Published Date: July 18, 2026 3:11 pm IST

लखनऊ, 18 जुलाई (भाषा) जमीयत उलमा-ए-हिंद (एएम) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मुसलमानों से देश में सांप्रदायिकता का मुकाबला करने के लिए अपने आसपास रहने वाले गैर-मुस्लिम लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनने और उनकी हरसंभव मदद करने की अपील की।

मदनी ने कहा कि इससे मुसलमानों के प्रति फैलाई जा रही गलतफहमियां दूर करने में मदद मिलेगी।

मदनी ने ‘हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद कॉन्फ्रेंस’ को संबोधित करते हुए कहा कि मुसलमानों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘‘प्रोपेगेंडा’’ का प्रभावी जवाब संवाद और आपसी विश्वास से ही दिया जा सकता है।

उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के मदरसों में वर्ष में कम से कम एक बार गैर-मुस्लिम लोगों को आमंत्रित करें और उन्हें बताएं कि वहां क्या पढ़ाया जाता है, मुसलमानों का रहन-सहन कैसा है तथा उनके उसूल और धार्मिक मान्यताएं क्या हैं, ताकि उनके मन में मौजूद गलतफहमियां दूर हो सकें।

उन्होंने देश में सांप्रदायिकता बढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस और अन्य सरकारों के शासनकाल में भी मुसलमानों को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन मौजूदा दौर में मुसलमानों के साथ-साथ उनके धर्म, धार्मिक मान्यताओं और उसूलों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

मौलाना मदनी ने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वह इस कठिन समय में इस्लाम के वास्तविक मूल्यों का परिचय देते हुए सभी गैर-मुस्लिम भाइयों के सुख-दुख में उनके साथ खड़ा हो और अपनी क्षमता के अनुसार उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास करे।

उन्होंने कहा, ‘नफरत की आग को नफरत से नहीं बुझाया जा सकता। इसे केवल प्यार, मोहब्बत और भाईचारे से ही समाप्त किया जा सकता है।’’

मदनी ने कहा कि मुसलमानों को हिंदू और अन्य मजहब को मनने वाले अपने भाइयों को यह बताना चाहिए कि इस्लाम प्रेम, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर इस्लाम कत्ल और जुल्म का पैगाम देता, तो वह दुनिया में सबसे तेजी से फैलने वाला धर्म नहीं होता।’’

उन्होंने सभी देशवासियों से अपील की कि वे सांप्रदायिकता के खिलाफ प्रेम और सद्भाव का वातावरण बनाएं। उन्होंने कहा कि घर, मोहल्ले, बाजार और समाज के हर स्तर पर भाईचारे की बात होनी चाहिए और उस पर अमल भी होना चाहिए।

मौलाना मदनी ने कहा कि यदि मुसलमान इस्लाम की मूल भावना को अपनाकर अपने चरित्र, रहन-सहन और व्यवहार से भाईचारे का संदेश देंगे, तभी देश का माहौल बेहतर हो सकेगा।

प्रश्नपत्र लीक और अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मदनी ने संवाददाताओं से कहा कि पेपर लीक लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है और इसका समाधान संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए।

रामपुर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर चलाने के रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला गलत है।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी राय में जौहर विश्वविद्यालय को बने रहना चाहिए। उसे ध्वस्त करना उचित नहीं है।’’

मदनी ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के निर्माण में किसी प्रकार की औपचारिकता अधूरी रह गई है या कोई खामी है, तो सरकार उसके लिए जुर्माना लगा सकती है, लेकिन विश्वविद्यालय को ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वहां हजारों छात्र पढ़ रहे हैं और उनके भविष्य का सवाल जुड़ा है।

वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में उच्चतम न्यायालय की अपील के बावजूद हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच मध्यस्थता से सहमति नहीं बनने के संबंध में पूछे गए सवाल पर मदनी ने कहा कि यदि दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं, तो इसमें कुछ नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर दोनों पक्ष मध्यस्थता न चाहकर अदालत के फैसले को ही मानने की बात कर रहे हैं, तो यह उनका अपना फैसला है। अदालत को अपना किरदार निभाना चाहिए।’

सम्मेलन को वाराणसी के संकट मोचन मंदिर के महंत एवं आईआईटी (बीएचयू) के प्रोफेसर विशंभर नाथ मिश्रा, उच्चतम न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह तथा ईसाई, बौद्ध और सिख समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया।

भाषा सलीम वैभव खारी

खारी


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