अखिलेश यादव जाट समाज से माफी मांगें: मायावती

अखिलेश यादव जाट समाज से माफी मांगें: मायावती

अखिलेश यादव जाट समाज से माफी मांगें: मायावती
Modified Date: August 22, 2026 / 03:09 pm IST
Published Date: August 22, 2026 3:09 pm IST

लखनऊ, 22 अगस्त (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शनिवार को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के बारे में की गई अमर्यादित टिप्पणी के लिए उन्हें पूरे जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।

इस बीच शनिवार को मामले में उप्र के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर प्रहार करते हुए कहा कि उन्हें केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी से तत्काल माफी मांगनी चाहिए।

मायावती ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि अखिलेश यादव का सार्वजनिक रूप से अपने पूर्व सहयोगी के बारे में यह कहना कि ‘हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’ पूरी तरह अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक है।

उन्होंने कहा कि अखिलेश को रालोद और उसके नेता के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने के लिए पूरे जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का चाल, चरित्र और चेहरा विरोधी दलों को ही नहीं, बल्कि सहयोगी पार्टियों के प्रति भी संकीर्ण और जातिवादी रहा है। इसका राजनीतिक लाभ अक्सर भाजपा को मिला और धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर हुईं।

मायावती ने कहा कि सपा के इसी रवैये के कारण 1993 में बना सपा-बसपा गठबंधन टूट गया और दो जून, 1995 को कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ।

उन्होंने कहा कि 2019 में लोकसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव के आश्वासन पर बसपा ने फिर गठबंधन किया, लेकिन चुनावी नतीजे अनुकूल न आने के बाद सपा के अहंकारी और स्वार्थी रवैये के कारण वह भी टूट गया।

मायावती ने आरोप लगाया कि सपा गठबंधन का इस्तेमाल करके केवल अपना काम निकालना जानती है और काम निकलने के बाद दूसरी पार्टियों के खिलाफ अनाप-शनाप भाषा का इस्तेमाल करती है।

मायावती ने सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सपा प्रमुख राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार ‘पी’ का अर्थ कभी पिछड़ा वर्ग तो कभी पंडितों का हित बताते हैं।

उन्होंने कहा कि सपा अपनी जाति को छोड़कर अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और विशेषकर ब्राह्मण समाज की हितैषी नहीं रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और सवर्ण समाज, खासकर ब्राह्मणों का शोषण हुआ और सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए।

मायावती ने कहा कि सपा सरकारों में गुंडों, बदमाशों, माफिया और अराजक तत्वों का ही भला हुआ तथा महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति भी खराब थी।

उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से आगामी विधानसभा चुनाव में सपा को सत्ता में नहीं आने देने की अपील की।

गत दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए तंज कसा था कि गठबंधन में जाने कहां-कहां से लोग आए थे, जिन्हें उन्होंने ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’, लेकिन इसके बावजूद वे पार्टी छोड़कर चले गए।

सपा के साथ 2022 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन करने वाले कई दल बाद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा बन गए। इनमें सबसे प्रमुख राष्ट्रीय लोकदल है।

रालोद प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत सिंह चौधरी ने देर रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में सपा प्रमुख के बयान पर बिना नाम लिए पलटवार करते हुए कहा, ‘‘सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते, कोई बात नहीं थी…।’’

इसी पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘‘जाट समाज को निशाना बनाना और कहना कि एबीसीडी हमने सिखाई? मैं इस अहंकार को करीब से देख चुका हूं और मानता हूं कि ऐसा आचरण सिर्फ पतन लाता है!’’

उप्र के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की कमाई, सपा बहादुर ने गंवाई। यह सोलह आने सच है। लेकिन इस छटपटाहट ने सपा बहादुर अखिलेश यादव का मनोबल ऐसा तोड़ा है कि वे अपनी ज़ुबान से अगड़ा, पिछड़ा और दलितों में से किसी पर भी अपनी लाठी चला देते हैं।’’

पोस्ट में उन्होंने कहा, “अब केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी पर घटिया बयान देकर अपनी उसी छटपटाहट को उजागर कर दिया जबकि ‘भारत रत्न’ चौधरी चरण सिंह जी का सैफई परिवार पर इतना कर्ज है कि सपा बहादुर उसे चुका नहीं सकते। सपा बहादुर को जयंत चौधरी से तुरंत माफी मांगनी चाहिए।’’

मौर्य ने कहा कि ‘‘उनकी (अखिलेश यादव) छटपटाहट इसलिए भी है कि अगड़ा-पिछड़ा-दलित की ‘त्रिवेणी’ भाजपा के साथ है। इसमें कोई शक नहीं है कि उत्तर प्रदेश की जनता जातिवाद व मुस्लिम तुष्टीकरण में डूबी सपा का बोरिया-बिस्तर समेटकर 2027 में उसे सैफई भेज देगी।’’

उप्र में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के विवाद से राजनीतिक पारा चढ़ गया है।

भाषा आनन्द रंजन

संतोष

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