मायावती ने प्रश्नपत्र लीक रोकने से जुड़े नए प्रावधानों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए
मायावती ने प्रश्नपत्र लीक रोकने से जुड़े नए प्रावधानों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए
लखनऊ, 29 जुलाई (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने बुधवार को सवाल किया कि क्या प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए प्रस्तावित नया कानून अकेले बार-बार खड़ी होने वाली इस समस्या को खत्म करने के लिए पर्याप्त होगा।
उन्होंने कहा कि ध्यान अपराध होने के बाद कड़ी सजा देने पर नहीं, बल्कि उसे होने से रोकने पर होना चाहिए।
मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि लोकसभा ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित कर दिया है, जिसमें प्रश्नपत्र लीक के मामलों में अधिक कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि लेकिन लोगों के मन में अब भी यह संदेह है कि क्या केवल इस कदम से समस्या का समाधान हो जाएगा।
बसपा प्रमुख ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों का भविष्य खराब किया जिनमें से कई विद्यार्थियों ने खुदकुशी कर ली।
उन्होंने कहा कि दंडात्मक प्रावधानों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण ऐहतियाती व्यवस्थाएं होती हैं।
मायावती ने शिक्षा ऋणों को किफायती और कल्याण उन्मुखी बनाने, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने जैसे उपायों पर जोर दिया, जिससे गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित हों।
उन्होंने कहा कि संभ्रांत परिवारों से बच्चे वित्तीय साधनों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं जबकि गरीब परिवारों के लाखों प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपना करियर बनाने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने संसद में इस विधेयक पर चर्चा को लेकर भी निराशा व्यक्त की और आरोप लगाया कि ज्यादातर राजनीतिक दल पक्षपातपूर्ण राजनीति से ऊपर उठने में विफल हैं और आरोप प्रत्यारोप में उलझे हैं।
लोकसभा में बुधवार को प्रश्नपत्र लीक रोधी विधेयक पारित कर दिया गया, जिसमें 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
भाषा राजेंद्र
जोहेब
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