मोहम्मद अली जौहर स्वतंत्रता सेनानी थे: विश्वविद्यालय विवाद के बीच तज़ीन फातमा ने कहा

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मोहम्मद अली जौहर स्वतंत्रता सेनानी थे: विश्वविद्यालय विवाद के बीच तज़ीन फातमा ने कहा

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  • Publish Date - September 19, 2026 / 12:05 AM IST,
    Updated On - September 19, 2026 / 12:05 AM IST

रामपुर (उप्र), 18 सितंबर (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) की नेता और पूर्व सांसद तज़ीन फातमा ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पलटवार करते हुए कहा कि मोहम्मद अली जौहर एक महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रमुख राष्ट्रीय नेता थे।

फातमा की यह टिप्पणी मुख्यमंत्री द्वारा हाल में कथित तौर पर दिए गए उस बयान के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का नाम देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के नाम पर रखा गया है।

विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में अपने संबोधन में जेल में बंद सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान की पत्नी फातमा ने कहा कि जिन लोगों को इन नेता के बारे में गलतफहमी है, उन्हें इतिहास पढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘इस विश्वविद्यालय की स्थापना मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर की गई थी। जिन लोगों को इस नाम को लेकर कोई गलतफहमी है, मैं उनसे कहना चाहती हूं कि वे पुराना इतिहास पढ़ें। मौलाना मोहम्मद अली जौहर बहुत बड़े स्वतंत्रता सेनानी और बहुत बड़े नेता थे।’’

फातमा विश्वविद्यालय और उसके संस्थापक ट्रस्ट की सचिव रह चुकी हैं।

भारत की आजादी के लिए जौहर के संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने एक सम्मेलन में कहा था कि हम आजादी चाहते हैं, पूर्ण आजादी चाहते हैं और मैं किसी गुलाम देश में दफन नहीं होना चाहता।’’

विश्वविद्यालय की 38 इमारतों से संबंधित हालिया ध्वस्तीकरण आदेशों का जिक्र करते हुए फातमा ने कहा कि छात्रों ने विश्वविद्यालय के गेट पर धरना देकर और पुलिस तथा प्रशासन के दबाव का सामना करते हुए साहस दिखाया है।

उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों ने कहा था कि अगर विश्वविद्यालय की इमारतें गिरा भी दी गईं, तो वे यहीं पढ़ाई जारी रखेंगे-पेड़ों के नीचे और जमीन पर बैठकर।’’

फातमा ने कहा कि स्थापना के बाद से ही विश्वविद्यालय को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने इन परिस्थितियों का डटकर सामना करने के लिए विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को बधाई दी।

उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों से आए उन लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने उनके दावे के अनुसार विश्वविद्यालय की इमारतों को गिराए जाने के प्रस्ताव के विरोध में छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे शहर के लोग धरने पर बैठे बच्चों के साथ खड़े रहे। मैं यह भी कहना चाहती हूं कि जाति या धर्म के आधार पर किसी तरह का भेदभाव किए बिना पूरे देश ने इस विश्वविद्यालय को गिराए जाने का विरोध किया।’’

भाषा सं जफर शोभना

शोभना