उत्तर प्रदेश में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई: योगी
उत्तर प्रदेश में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई: योगी
लखनऊ, 13 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान राज्य में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई और कोई नहीं कह सकता कि नियुक्ति में कोई भेदभाव हुआ, किसी प्रकार का कोई लेन देन हुआ।
आदित्यनाथ ने यहां नियुक्ति पत्र वितरित करने के बाद डॉक्टर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के छठे स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान राज्य में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। यह एक बड़ी संख्या है और कोई व्यक्ति यह नहीं कह सकता है कि उसकी नियुक्ति में कोई भेदभाव हुआ है या किसी प्रकार का कोई लेनदेन हुआ है।’’
आदित्यनाथ ने दावा किया कि राज्य में कुल 16 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें साढ़े नौ लाख उनके कार्यकाल में नियुक्त हुए हैं।
उन्होंने कहा, ”जब नियुक्ति की पारदर्शिता है तो राज्य की प्रगति भी सही दिशा में आगे बढ़ेगी। हमने नौ वर्षों में उप्र की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है। उप्र की प्रति व्यक्ति आय तीन गुना बढ़ी है और अब उप्र के नागरिकों के सामने पहचान का संकट नहीं है।’’
आदित्यनाथ ने कहा, ”नियुक्ति की प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी परिणाम उतना ही हमारे लिए फलदायी होगा। अगर हम अच्छे लोगों का चयन नहीं करेंगे, चयन की प्रक्रिया में विसंगतियां होंगी, भेदभाव होगा, पारदर्शिता-शुचिता का अभाव होगा तो जीवन भर उस पूरे संस्थान को कीमत चुकानी होगी।”
उन्होंने विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ”गलती एक व्यक्ति करता है, लेकिन उसकी कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ती है। पहचान का संकट संस्थान से जुड़े हुए लोगों के सामने खड़ा होता है। ठीक वैसे ही जैसे एक व्यक्ति और एक परिवार की (गलतियों की) कीमत उप्र को चुकानी पड़ती थी।”
उन्होंने कहा, ”एक व्यक्ति ने गलत किया, लेकिन कीमत पूरे प्रदेश को चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ा। पहचान के संकट से, कानून-व्यवस्था के भीषण संकट से, अराजकता और भ्रष्टाचार से प्रदेश को जूझना पड़ा।”
आदित्यनाथ ने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल और आयुर्विज्ञान संस्थान के एक होने और पूर्व में आने वाली शिकायतों का जिक्र करते हुए कहा कि ”पिछले कुछ समय से यहां की शिकायत कम आती हैं।”
उन्होंने कहा कि ”यहां के लिए पैसा देने में परेशानी नहीं होती थी, लेकिन हमें शिकायत सुनते सुनते परेशानी जरूर होती थी। उनसे मुक्ति मिली और यह मुक्ति तब मिलती है जब जनता में संतुष्टि होती है।’’
संस्थान की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह 20 बिस्तरों का एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनकर रहने वाला अस्पताल आज उप्र के एक बेहतरीन स्वास्थ्य व शिक्षा का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उप्र में स्वास्थ्य क्षेत्र समेत हर क्षेत्र में प्रगति हुई है।
समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि छह वर्षों में इस संस्थान के प्रति लोगों की धारणा बदली है। उन्होंने कहा कि संस्थान का नाम एक दिन पूरी दुनिया में होगा और दावा किया कि इसकी प्रगति देखकर लगता है कि एक दिन नोबेल पुरस्कार भी मिलेगा।
पाठक ने कहा, ‘‘आज का युवा पूरी दुनिया को मुठ्ठी में देखना चाहता है और यहां के युवा एक नया रास्ता दिखाएंगे। यह संस्थान छह सालों में बहुत आगे बढ़ा है और आने वाले छह सालों में और आगे जाएगा।’’
उन्होंने 2017 के पहले की पूर्ववर्ती सरकारों पर ठेका-पट्टा संस्कृति में लिप्त रहने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि भाजपा का कोई कार्यकर्ता ठेका-पट्टा में संलिप्त नजर नहीं आएगा।
भाषा आनन्द आशीष
आशीष

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