सपा सांसद जावेद अली खान के बयान पर उप्र में सियासी विवाद, भाजपा ने जताई कड़ी आपत्ति
सपा सांसद जावेद अली खान के बयान पर उप्र में सियासी विवाद, भाजपा ने जताई कड़ी आपत्ति
लखनऊ, 15 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश में सोमवार को उस समय राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया जब समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सदस्य जावेद अली खान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के “जहर” ने बहुसंख्यक समुदाय को प्रभावित किया है और उन्हें “जहरीला” बना दिया है।
खान ने यह टिप्पणी मुरादाबाद में आयोजित पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मेलन के दौरान की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा दिया है, जिसका असर बहुसंख्यक समुदाय पर भी पड़ा है।
सपा सांसद ने कहा, ‘‘भाजपा द्वारा फैलाए गए ‘जहर’ ने बहुसंख्यक समुदाय को प्रभावित किया है और इसके परिणामस्वरूप बहुसंख्यक समुदाय ‘जहरीला’ हो गया है।’’
उनके इस बयान की भाजपा नेताओं ने कड़ी आलोचना करते हुए इसे हिंदू समाज का अपमान बताया है।
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि यह बयान किसी व्यक्ति की राय नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी की सोच को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान सपा प्रमुख अखिलेश यादव के इशारे पर दिया गया है।
राजभर ने कहा, ‘‘जावेद अली खान ने आज जो कहा है, उसे प्रदेश और देश की जनता समझ रही है। यह सिर्फ उनका बयान नहीं है, बल्कि समाजवादी पार्टी की मानसिकता को दर्शाता है।’’
उन्होंने सपा प्रमुख से सवाल किया कि क्या वे इन बयानों से सहमत हैं और क्या यह सपा की आधिकारिक सोच है।
एक अन्य मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने इस बयान को “तुच्छ” और संकीर्ण मानसिकता वाला बताया। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक समुदाय ने हमेशा समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर देश की एकता को मजबूत किया है।
पांडेय ने कहा, ‘‘ऐसी बातें दुर्भाग्यपूर्ण हैं।’’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी कॉरिडोर और मथुरा से जुड़े विकास कार्यों को लेकर असहज हैं।
भाजपा के राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा ने भी सपा सांसद के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा जाति और सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा दिया है।
शर्मा ने कहा, ‘‘सनातन धर्म मानव कल्याण और सबको साथ लेकर चलने की बात करता है, जबकि समाजवादी पार्टी ने हमेशा जाति और सांप्रदायिक राजनीति की है।’’
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और सत्ताधारी भाजपा तथा विपक्षी दल एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं।
भाषा
अभिनव, आनन्द रवि कांत

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