मथुरा में धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई राधाष्टमी
मथुरा में धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई राधाष्टमी
मथुरा (उप्र), 19 सितंबर (भाषा) मथुरा में शनिवार को देवी राधा की 5,254वीं जयंती राधाष्टमी धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई और जिले के प्रमुख मंदिरों के बाहर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए कतारों में मौजूद रहे।
मुख्य आयोजन बरसाना स्थित श्री राधा रानी मंदिर और रावल स्थित लाडोजी मंदिर में हुए। दोनों स्थानों को देवी राधा के जन्म से जुड़े प्रमुख स्थलों के रूप में माना जाता है।
बरसाना मंदिर के सेवायत (पुजारी) सौरव गोस्वामी ने बताया कि राधा रानी का जन्म ‘मूल नक्षत्र’ में हुआ था, इसलिए रात दो बजे ‘मूल शांति’ अनुष्ठान किया गया। इसके बाद महाभिषेक और महाआरती हुई।
बाद में देवी को पीले वस्त्र, आभूषण और मुकुट से सजाया गया और श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए।
शाम को देवी की प्रतिमा को सफेद स्तंभों वाले मंडप में विशेष दर्शन के लिए लाया गया। मंदिर के एक अन्य पुजारी बृजेश गोस्वामी ने बताया कि वर्ष में केवल तीन अवसर ऐसे होते हैं, जब देवी मंडप से श्रद्धालुओं को दर्शन देती हैं। इस अवसर पर ‘छप्पन भोग’ और फलों का भोग लगाया गया तथा लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।
रावल में भी राधाष्टमी का आयोजन किया गया। रावल में देवी की प्रतिमा को शिशु के रूप में बैठी हुई मुद्रा में श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए दर्शाया जाता है।
ज्योतिषाचार्य केशव आचार्य ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों में देवी राधा के जन्मस्थान को लेकर मतभेद है। कुछ ग्रंथों में बरसाना, जबकि कुछ अन्य में रावल को उनका जन्मस्थान बताया गया है।
यह दिन संत स्वामी हरिदास के वृंदावन आगमन की 489वीं वर्षगांठ के रूप में भी मनाया गया। स्वामी हरिदास 25 वर्ष की आयु में अलीगढ़ से वृंदावन आए थे।
भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को सात जोन और 20 सेक्टरों में बांटा और यातायात के लिए विस्तृत योजना बनाई।
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और अधिकारियों को भक्तों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
भाषा सं. सलीम शोभना
शोभना

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