राम मंदिर वित्तीय अनियमितता मामले में एसआईटी का कार्यकाल 15 जुलाई तक बढ़ाया गया
राम मंदिर वित्तीय अनियमितता मामले में एसआईटी का कार्यकाल 15 जुलाई तक बढ़ाया गया
लखनऊ, एक जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के दान और वित्तीय प्रबंधन से संबंधित आरोपों की जांच कर रहे तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का कार्यकाल 15 दिन बढ़ा दिया। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
प्रदेश सरकार ने आरोपों की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया था और शुरुआत में उसे 15 दिन का समय दिया था।
यहां जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ”मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) का कार्यकाल 15 जुलाई बढ़ा दिया है। मामले के विभिन्न पहलुओं से गहन छानबीन के लिए एसआईटी ने मुख्यमंत्री से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए उन्होंने आगामी 15 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।”
एक अधिकारी ने बताया कि 23 जून को एसआईटी द्वारा प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद 25 जून को मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई और आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टीनू यादव को गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने बताया कि मामले की गहराई से जांच करने और जांच का दायरा बढ़ाने के लिए एसआईटी का कार्यकाल 15 दिन और बढ़ा दिया गया है।
एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त आईएएस विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल है।
बयान के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन करने वाले आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एसआईटी इस प्रकरण में हर पहलू की गहनता और निष्पक्षता से जांच करते हुए सच्चाई सामने लाएगी।
गत 23 जून को एसआईटी के प्रमुख सदस्य लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपा थी, जिसमें कठोर कार्रवाई की सलाह दी गई थी।
इन संस्तुतियों के आधार पर 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें आठ नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया था। सभी नामजद अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
भाषा जफर मनीष जोहेब
जोहेब

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