राम मंदिर चढ़ावा चोरी से भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची, अयोध्या को बदनाम करना उचित नहीं: आदित्यनाथ

राम मंदिर चढ़ावा चोरी से भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची, अयोध्या को बदनाम करना उचित नहीं: आदित्यनाथ

राम मंदिर चढ़ावा चोरी से भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची, अयोध्या को बदनाम करना उचित नहीं: आदित्यनाथ
Modified Date: July 15, 2026 / 02:14 pm IST
Published Date: July 15, 2026 2:14 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

लखनऊ, 15 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना से ‘‘हम जैसे राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है’’ लेकिन इस मामले के बहाने अयोध्या और राम जन्मभूमि को बदनाम करना उचित नहीं है।

‘इंडिया टुडे समूह’ के कार्यक्रम ‘‘पंचायत आज तक’’ को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने पुराने रिकॉर्ड के बावजूद आस्था से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अयोध्या की घटना ने निश्चित रूप से हम सभी की, हम जैसे राम भक्तों की आस्था को चोट पहुंचाई है। ‘राम मंदिर ट्रस्ट’ एक स्वतंत्र संस्था है और सरकार को इसके मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। ट्रस्ट ने जांच का अनुरोध किया और राज्य सरकार ने एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया। जैसे ही एसआईटी की रिपोर्ट आई, कार्रवाई शुरू कर दी गई।’’

उन्होंने कहा कि चोरी की घटना में कथित रूप से शामिल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनकी सहायता करने के आरोप में दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।

योगी ने कहा कि गिरफ्तारी के साथ-साथ नैतिक आधार पर दो इस्तीफे भी हुए हैं, जिनमें ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इस घटना का इस्तेमाल अयोध्या, राम जन्मभूमि और हिंदुओं की आस्था को बदनाम करने के लिए करना उचित नहीं है।’’

सपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग अब आस्था की बात कर रहे हैं, उन्होंने पहले धार्मिक परंपराओं के खिलाफ काम किया था।

उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘2017 से पहले की अवधि को याद करें। समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान, कांवड़ यात्रा, रामनवमी जुलूस, जन्माष्टमी समारोह और दुर्गा पूजा पंडालों की अनुमति नहीं थी। जिन लोगों ने ऐसे त्योहारों पर प्रतिबंध लगाया था, वे आज आस्था की बात कर रहे हैं। यह विडंबना है।’’

उन्होंने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीबारी के जिम्मेदार अब धार्मिक आस्था की बात कर रहे हैं।

उन्होंने पिछली सरकारों पर हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज की इजाजत देकर ‘माहौल खराब करने’ की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे वास्तव में धर्मनिरपेक्ष थे, तो उन्हें मस्जिद के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ करने की भी अनुमति देनी चाहिए थी, लेकिन यह एकतरफा दृष्टिकोण था।’’

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जो लोग अब राम मंदिर पर सवाल उठा रहे हैं, उन्होंने पहले उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर कर भगवान राम और भगवान कृष्ण के अस्तित्व पर सवाल उठाया था और कानूनी तरीकों से राम मंदिर के निर्माण में बाधा डालने का प्रयास किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने हर स्तर पर राम मंदिर का विरोध किया और आज वे चढ़ावा चोरी के मुद्दे को अपनी सबसे बड़ी चिंता बता रहे हैं, जबकि अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार और घोटालों पर चुप हैं।’’

आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बदलाव आया है, प्रमुख धार्मिक केंद्र देश के लिए ‘मॉडल’ बनकर उभरे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि समाजवादी पार्टी क्यों परेशान है। उन्होंने एक बार दावा किया था कि अयोध्या में एक पक्षी भी नहीं उड़ सकता, लेकिन आज लाखों भक्त हर दिन राम मंदिर में पूजा करने आते हैं।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा, ‘‘चाहे फूल बेचने वाले हों, रिक्शा चालक हों, चाय बेचने वाले हों, रेस्तरां मालिक हों, होटल संचालक हों, टैक्सी चालक हों या नाविक हों, सभी को आर्थिक लाभ हुआ है और सम्मान और पहचान मिली है।’’

महाकुंभ का जिक्र करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले साल के आयोजन ने महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि उत्पन्न की थी।

उन्होंने दावा किया, ‘‘45 दिवसीय महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। एक अकेले नाविक के परिवार ने आयोजन के दौरान लगभग 30 करोड़ रुपये कमाए।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को ऐसी समृद्धि नापसंद है और वे चाहते हैं कि आर्थिक विकास ‘‘केवल दो परिवारों’’ तक ही सीमित रहे।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव का नाम लिए बिना उन पर स्पष्ट रूप से कटाक्ष करते हुए, आदित्यनाथ ने उन्हें विशेषाधिकार के आदी ‘‘दो राजकुमारों’’ के रूप में वर्णित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘वे चांदी के चम्मच के साथ पैदा हुए हैं, देर से उठते हैं और नहीं जानते कि गर्मी, बारिश या कठिनाई का क्या मतलब है। एक ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करता रहता है, दूसरा ‘फीफा’ (फुटबॉल विश्वकप) कार्यक्रमों का आनंद लेने के लिए पर्यटक वीजा पर अमेरिका जाता है। वे विदेश यात्रा करते हैं और फिर राजनीतिक लाभ के लिए जाति के आधार पर समाज को विभाजित करने के लिए लौट आते हैं। लोग यह सब समझते हैं और उन्हें माफ नहीं करेंगे।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का नौ साल का कार्यकाल पारदर्शिता से भरा रहा है और उन्होंने 2003 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश पर शासन करने वाली सरकारों से तुलना करने को कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे नौ साल के शासन का समय लोगों के सामने है, जैसे पिछली सरकारों का कार्यकाल उनके सामने है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी और गतिशील नेतृत्व के तहत, हमने विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया है। ‘डबल इंजन’ की भाजपा की सरकार को उनके मार्गदर्शन और नेतृत्व से लाभ हुआ है।’’

आदित्यनाथ ने कहा कि विकसित भारत की अवधारणा का मतलब बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के लिए समृद्धि और अवसर का निर्माण करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘हर नागरिक समृद्ध हो, हर हाथ को काम हो, महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और व्यापारी राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। हम विकसित भारत के तहत विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’

अगले विधानसभा चुनाव को लेकर विश्वास व्यक्त करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश 2027 में एक नया राजनीतिक रिकॉर्ड बनाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘2027 में जब कोई पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटेगी तो उत्तर प्रदेश एक नया रिकॉर्ड बनाएगा। यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार होगी। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।’’

भाषा किशोर जफर सुरभि

सुरभि


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