लखनऊ, दो सितंबर (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के तौर पर एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल उठाए और पूछा कि मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर्मचारी अब भी जेल में क्यों हैं, जबकि वरिष्ठ जिम्मेदारों को क्लीन चिट दे दी गयी है।
यादव ने सहारनपुर दौरे के दौरान मंदिर ट्रस्ट के सीईओ की नियुक्ति को लेकर पूछे गये सवाल पर कहा, ‘‘इस बारे में मुझसे मेरी राय न पूछें क्योंकि नई बात की वजह से आप पुरानी बात भूल जाएंगे।’’
उन्होंने मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी के मामले में की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए।
यादव ने कहा, ‘‘अगर बड़े लोगों को क्लीन चिट मिल गई है, तो छोटे कर्मचारी अब भी जेल में क्यों हैं? उन्हें भी रिहा करवाएं’’
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भगवान राम को चढ़ाए गए चढ़ावे की ‘‘लूट’’ नहीं होगी।
इस बीच, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के पद पर मिश्रा की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘मैं मंदिर के नए सीईओ की नियुक्ति पर बधाई देता हूं। मैं भगवान राम के चरणों में प्रार्थना करता हूं कि उनके आशीर्वाद से सब कुछ अच्छा हो।’’
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं विधायक आराधना मिश्रा ने कहा कि नियुक्ति करने वालों को ही पता होगा कि यह फैसला किस आधार पर लिया गया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर के दान की कथित चोरी का मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की धार्मिक आस्था से जुड़ा है।
मिश्रा ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विशेष जांच टीम (एसआईटी) की तफ्तीश में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
मिश्रा ने कहा, ‘‘पहले हमें बताएं कि दान और चढ़ावा चुराने वालों का क्या हुआ।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छोटे कर्मचारियों को तो गिरफ्तार किया गया लेकिन उस समय मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले लोगों यानी चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सपा के राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने भी राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कथित तौर पर शामिल लोगों के विरुद्ध सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, ‘‘नई कमेटियां बनाई जा रही हैं और नया सीईओ नियुक्त किया जा रहा है, लेकिन सरकार ने उन लोगों के खिलाफ क्या किया है जिन्होंने पहले गड़बड़ी की थी?’’
सुमन ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार की बनाई गयी एसआईटी न्याय दिलाने में नाकाम रही है।
उन्होंने फिर से मांग की कि मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश या संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराई जाए।
सुमन ने यह भी आरोप लगाया कि एसआईटी दोषियों को बचा रही है और उसकी जांच केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है।
वाराणसी में, पातालपुरी मठ के प्रमुख जगतगुरु बालक दास देवाचार्य महाराज ने सीईओ के पद पर मिश्रा की नियुक्ति का कड़ा विरोध किया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन सरकार द्वारा नियुक्त सीईओ के बजाय संतों की देखरेख में होना चाहिए।
इस कदम को ‘‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’’ बताते हुए देवाचार्य ने कहा कि सीईओ सरकार के निर्देशों के अनुसार काम करेगा और मंदिर में ‘वीआईपी कल्चर’’ को बढ़ावा दे सकता है।
उन्होंने तर्क दिया कि एक प्रशासनिक अधिकारी कामकाज संभालने में तो सक्षम हो सकता है लेकिन जरूरी नहीं कि वह मंदिर की पूजा-पद्धति, परंपराओं और रीति-रिवाजों को समझे।
देवाचार्य ने कहा, ‘‘मठ और मंदिर की ज़िम्मेदारी संतों और उनकी देखरेख में होनी चाहिए।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा न होने पर अनियमितताएं, विवाद और ‘वीआईपी कल्चर’ जारी रहेगा।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में 62 वर्षीय जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया।
भाषा सलीम शफीक
शफीक