बलिया, छह जून (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पूर्व सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के हिस्ट्रीशीटर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोनू को शनिवार को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने एक अन्य मामले में बृहस्पतिवार को बलिया की गैंगस्टर अधिनियम अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में मऊ जेल भेज दिया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, 12 आपराधिक मामलों में आरोपी सिंह सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे रथ हत्याकांड में भी वांछित था।
जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव सिंह ने बताया कि पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की अदालत द्वारा जारी वारंट के आधार पर सीबीआई उसे कोलकाता ले गई है।
सीबीआई ने बलिया के शीतल दवानी गांव निवासी सिंह को मऊ जिला कारागार से अपनी हिरासत में लिया।
रथ की हत्या के संबंध में कोलकाता के मध्यमग्राम थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2023 में बांसडीह रोड थाने में दर्ज गैंगस्टर अधिनियम के एक मामले में अदालत में पेश नहीं होने पर सिंह के खिलाफ 25 मई को गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।
सिंह की पत्नी पहले दावा कर चुकी हैं कि उनके पति निर्दोष हैं और उन्हें सीबीआई जांच पर पूरा भरोसा है।
इस बीच, सिंह का एक वीडियो और एक फेसबुक पोस्ट भी सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें उसने रथ हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की मांग की थी और कई लोगों को कथित साजिशकर्ता बताया था।
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई इससे पहले बलिया जिले के दो अन्य आरोपियों-थम्हनपुरा गांव के नवीन कुमार सिंह और बांसडीह रोड क्षेत्र के गोलू सिंह उर्फ टाइगर-को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले जा चुकी है।
एक अन्य आरोपी रसड़ा क्षेत्र निवासी राज कुमार सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर कोलकाता ले जाया जा चुका है।
इस ताजा घटनाक्रम के साथ रथ हत्याकांड की जांच में बलिया जिले के चार लोग अब तक सीबीआई के रडार पर आ चुके हैं।
चंद्रनाथ रथ की छह मई को पश्चिम बंगाल में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के दो दिन बाद हुई थी। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।
भाषा
सं, जफर रवि कांत