उप्र विधानसभा में नियमावलियों से ‘‘कुष्ठाश्रम’’ शब्द हटाने के लिए दो विधेयक ध्वनि मत से पारित
उप्र विधानसभा में नियमावलियों से ‘‘कुष्ठाश्रम’’ शब्द हटाने के लिए दो विधेयक ध्वनि मत से पारित
लखनऊ, 17 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सातवें दिन मंगलवार को कुष्ठ रोगियों के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने और उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए निकाय नियमावलियों से ‘‘कुष्ठाश्रम’’ शब्द हटाने के लिए दो विधेयक ध्वनि मत से पारित किये गए।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने दोनों विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित करने की घोषणा की।
विधानसभा में मंगलवार को नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 और उत्तर प्रदेश नगर पालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में पारित कराने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत अब ‘‘कुष्ठाश्रम’’ शब्द को हटाने का प्रावधान किया गया है।
सदन में विधेयक पारित होने के पहले विपक्ष ने इन दोनों विधेयकों को प्रवर समिति को सौंपे जाने का प्रस्ताव रखा। समाजवादी पार्टी के सदस्य फहीम इरफान ने इसे प्रवर समिति को सौंपे जाने का प्रस्ताव रखा। सपा सदस्य डॉ. रागिनी सोनकर ने कहा कि कुष्ठ रोगी पीड़ित लोगों को भेदभाव से बचाने के लिए सरकार को कुछ सुझाव देना चाहते हैं कि सिर्फ शब्दावली से भेदभाव सही से नहीं रोका जा सकता। सपा के संदीप सिंह समेत कई सदस्यों ने भी सुझाव दिए।
इस बीच स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि यह असाध्य रोग नहीं है। इसके पक्ष में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मंजू सिवाच समेत सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने इस विधेयक का समर्थन किया। प्रवर समिति को सौंपे जाने का बहुमत न होने से ये दोनों विधेयक पारित किए गए।
नगर विकास मंत्री ने कहा कि इस विधेयक में यह प्रस्ताव किया गया है कि उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 8 उप धारा (एक) के खंड (ख) में शब्द और प्रतीक ‘कुष्ठाश्रम’ निकाल दिए जाएंगे।
भाषा आनन्द गोला
गोला

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