लखनऊ, 10 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश विधान परिषद में मंगलवार को आउटसोर्स कर्मचारियों की भविष्य निधि (ईपीएफ) की धनराशि कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं कराये जाने का मामला उठा।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य विजय बहादुर पाठक ने शून्य काल में यह मामला उठाते हुए कहा कि राज्य में कई स्थानों से यह जानकारी मिल रही है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भविष्य निधि (ईपीएफ) की कटौती तो उनके वेतन से नियमित रूप से की जा रही है मगर वह रकम इनके खातों में नहीं पहुंच रही है। इसको लेकर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों में नाराजगी है।
उन्होंने कहा कि जगह-जगह कर्मचारी इसकी शिकायत संबंधित विभागाध्यक्ष से कर रहे है। विभागाध्यक्ष संबंधित ठेकेदार और सेवा प्रदाता कंपनी के ऊपर दोष मढ़ रहे है। बरेली, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, वाराणसी सहित कई नगर निगमों में इस तरह की जानकारी आयी है। लखनऊ में तो नगर निगम के कर्मचारियों ने अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है कि उनकी ईपीएफ की धनराशि एजेंसी, ठेकेदार और नगर निगम के अधिकारी मिलीभगत कर हड़प रहे है।
पाठक ने सदन में बिजली के बिल के नियमित भुगतान के बावजूद बिल में बकाया दर्शाने के विषय को भी उठाया। इस पर पीठ ने सरकार को वक्तव्य देने के निर्देश दिये।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था बेहतर हुई है मगर पावर कॉरपोरेशन द्वारा उन विद्युत उपभोक्ताओं के साथ बड़े पैमाने पर लापरवाही की जा रही है जो प्रतिमाह नियमित रूप से बिजली के बिल का भुगतान करते हैं।
पाठक ने कहा कि ऊर्जा प्रभार के नाम पर तर्क संगत टैरिफ (दरों) के अनुसार शहरी और ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं के विद्युत बिल जारी करने में लापरवाही बरती जा रही है। कई स्थानों पर टैरिफ (दर) के आधार पर विद्युत बिल प्रस्तुत नहीं किए जा रहे है। इसके अलावा नियमित रूप से बिल का भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं से प्रतिमाह के बिलों में बकाया धनराशि दिखाई जाती है और फिर इसकी वसूली भी की जाती है।
उन्होंने कहा कि ईमानदार विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा जब प्रतिमाह जो विद्युत बिल आया है उसका भुगतान किया जा रहा है तो फिर अगले बिल में बकाया क्यों दर्शाया जा रहा है।
भाषा
सलीम रवि कांत