लखनऊ, एक जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत पाठ्यक्रम समन्वयक की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर एक कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इसके साथ ही विभागीय और प्रशासनिक जांच भी शुरू कर दी गई है। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के निर्देश पर की गई है।
समाज कल्याण विभाग द्वारा बुधवार को जारी बयान के अनुसार, लखनऊ स्थित ‘अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड’ तथा संबंधित आवेदकों के खिलाफ गोमतीनगर थाने में प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मंत्री ने बताया कि 29 अक्टूबर 2025 को एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें राज्यभर में संचालित अभ्युदय कोचिंग केंद्रों के लिए अनुबंध आधार पर पाठ्यक्रम समन्वयक की नियुक्ति के लिए निकाली गई भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। इसके बाद विभागीय जांच कर भर्ती से जुड़े सभी दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई।
बयान के अनुसार, जांच में सामने आया कि नियमों के तहत पाठ्यक्रम समन्वयक पद पर नियुक्ति के लिए उत्तर प्रदेश पीसीएस मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य था, लेकिन कई ऐसे उम्मीदवारों को नियुक्त किया गया था जिन्होंने यह परीक्षा पास नहीं की थी। जांच किए गए 69 उम्मीदवारों में से केवल 21 को ही योग्य पाया गया।
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए कथित तौर पर जाली और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जिसके लिए संबंधित अनुबंध कंपनी को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार ठहराया गया है।
मंत्री ने दस्तावेज सत्यापन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तथा लापरवाही की प्रशासनिक जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने भविष्य में अनुबंध आधार पर की जाने वाली सभी नियुक्तियों के लिए पुलिस सत्यापन और दस्तावेज सत्यापन अनिवार्य करने के भी आदेश दिए हैं।
अरुण ने कहा कि पारदर्शिता और पात्रता मानदंडों का पालन सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में कार्यरत सभी अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारियों का भी सत्यापन कराया जाएगा।
भाषा किशोर जफर खारी
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