उप्र : नेपाल त्रासदी के पीड़ित ने लगायी सरकार से मदद की गुहार
उप्र : नेपाल त्रासदी के पीड़ित ने लगायी सरकार से मदद की गुहार
बलिया (उप्र), सात सितंबर (भाषा) नेपाल में हाल ही आयी विनाशकारी बाढ़ में अपनी पत्नी और बेटे को खोने वाले बलिया के निवासी एक व्यक्ति ने केंद्र और राज्य सरकार से आर्थिक सहायता की गुहार लगायी है। जिला प्रशासन ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई का भरोसा दिया है।
नेपाल के त्रिशूली बाजार में रहकर व्यवसाय कर रहे बलिया जिले के रसड़ा कस्बे के मूल निवासी पन्ना लाल चौरसिया का सब कुछ विगत 26 अगस्त को नेपाल में आयी प्रलयंकारी बाढ़ में तबाह हो गया।
चौरसिया ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि नेपाल की जल त्रासदी ने उनसे उनकी पत्नी जगाधर और बेटे राहुल को छीन लिया है। उन्होंने बताया कि अचानक आयी बाढ़ के दौरान उनका बेटा उनकी आँखों के सामने मिट्टी में धंस गया जबकि उनकी पत्नी को रौद्र रूप धारण करके आयी लहर अपने साथ बहाकर लेकर गयी।
उन्होंने बताया, ”नेपाल की जल त्रासदी ने मुझे कंगाल कर दिया है। हमारा तो जैसे जीवन ही खत्म हो गया है। त्रासदी में सबकुछ गंवाने के बाद मेरे पास नेपाल से घर आने तक के लिए पैसे नहीं थे। कुछ शुभचिंतकों ने बलिया तक आने के किराये और कपड़ों का प्रबन्ध किया।”
चौरसिया ने केंद्र और राज्य सरकार से नेपाल जल त्रासदी के पीड़ितों का सहयोग करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जिस तरह से नेपाल में मदद कर रही है उसी तरह उसे त्रासदी में अपना अब कुछ गवां चुके लोगों का पता लगाकर उनकी आर्थिक सहायता करनी चाहिए।
इस बीच, जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने ‘पीटीआई—भाषा’ को बताया कि उन्होंने पीड़ित परिवार की मांग को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा कि पीड़ितों की आर्थिक स्थिति का आकलन करके उनकी हर संभव मदद की जाएगी।
रसड़ा के पुरानी मस्जिद मोहल्ले में पले—बढ़े पन्ना लाल चौरसिया के भाई अशोक कुमार चौरसिया ने संवाददाताओं को बताया कि वह नेपाल के त्रिशूला बाजार में रहते थे।
उन्होंने बताया कि नेपाल में जल त्रासदी आने के पहले स्थानीय पुलिस ने इस बारे में लोगों को सतर्क किया था और उसके 20 मिनट के अंदर ही बाढ़ का पानी बहुत वेग से आ गया और कम से कम दो सौ फुट ऊंचा मलबा भी पहुंच गया।
अशोक ने कहा, ”बाढ़ में हमारा सबकुछ बह गया। अगर हम सामान बचाने की कोशिश करते तो खुद को भी नहीं बचा पाते। त्रासदी में हमारे पास कुछ भी नहीं बचा। भोजन करने तक के लिए पैसे नहीं है और न पहनने के लिए कपड़े हैं। सरकार से उम्मीद है कि वह मदद करेगी।”
चीन की सीमा से लगे नेपाल के रसुवा और आसपास के जिलों में ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में चट्टानों के खिसकने और हिमस्खलन के बाद 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ और उत्तरी तथा मध्य नेपाल में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान अब भी जारी है। जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में भी तलाश अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा बलों के साथ विशेष प्रशिक्षण प्राप्त अंतरराष्ट्रीय बचाव दल लापता लोगों का पता लगाने और शवों को बरामद करने में जुटे हैं।
इस आपदा के कारण कम से कम 32,000 परिवार विस्थापित हुए हैं। करीब 7,500 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं जबकि मध्य नेपाल में लोगों की आजीविका और जरूरी बुनियादी ढांचे पर भी गंभीर असर पड़ा है।
भाषा सं. सलीम मनीषा
मनीषा

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