उप्र: ‘कॉकरोच’ का वेश धारण कर त्रिवेणी की बदहाली दिखाने पहुंचे कथावाचक

उप्र: ‘कॉकरोच’ का वेश धारण कर त्रिवेणी की बदहाली दिखाने पहुंचे कथावाचक

उप्र: ‘कॉकरोच’ का वेश धारण कर त्रिवेणी की बदहाली दिखाने पहुंचे कथावाचक
Modified Date: May 31, 2026 / 11:00 pm IST
Published Date: May 31, 2026 11:00 pm IST

(अरुणव सिन्हा)

लखनऊ, 31 मई (भाषा) उत्तर प्रदेश के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) की सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता के बीच ‘कॉकरोच’ का वेश धारण कर यमुना नदी की बदहाली की ओर अधिकारियों और आम लोगों का ध्यान आकर्षित करने की अनोखी पहल की।

मथुरा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं कथावाचक दीपक शर्मा 22 मई को ‘कॉकरोच’ का वेश धारण यमुना के तट पर पहुंचकर त्रिवेणी की बदहाली की ओर ध्यान खींचा।

शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि यमुना नदी की खराब स्थिति की ओर ध्यान खींचने के लिए उन्होंने यह तरीका अपनाया और इस दौरान उन्हें इस छोटे जीव की प्रतीकात्मक ताकत का एहसास हुआ।

उन्होंने बताया कि इस पहल के बाद उन्हें मथुरा नगर आयुक्त कार्यालय से अधिकारियों से मिलने के लिए फोन आया था लेकिन उन्होंने अधिकारियों को स्वयं घाट पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने का आग्रह किया।

शर्मा ने अपनी संस्था ‘कॉमन जस्टिस प्लेटफॉर्म’ (सीजेपी) की शुरुआत की है।

उनका कहना है कि इसका उद्देश्य प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करना और युवाओं को सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक करना है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि वह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ भी सहयोग की योजना बना रहे हैं।

दिपके ने 16 मई को ‘एक्स’ पर ‘‘क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?’’ शीर्षक से एक पोस्ट किया था, जिसके बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ चर्चा में आई।

यह मंच खुद को युवाओं की आवाज बताता है।

शर्मा ने कहा कि लोगों में ‘कॉकरोच’ को लेकर पैदा हुई अचानक दिलचस्पी का उपयोग यमुना प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दों को सामने लाने के लिए किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि एक मथुरा निवासी होने के नाते उन्हें हिंदुओं की आस्था से जुड़ी यमुना नदी की स्थिति देखकर निराशा होती है।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, मथुरा के केशी घाट, विश्राम घाट और गोकुल बैराज सहित कई स्थानों पर यमुना का प्रदूषण स्तर चिंताजनक पाया गया है।

‘बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी’ के अधिकारी के.पी. सिंह के अनुसार, तापमान व पीएच स्तर स्वीकार्य सीमा में होने के बावजूद कई अन्य प्रदूषण संकेतक सुरक्षित मानकों से काफी अधिक हैं।

रिपोर्ट में ‘टोटल कोलीफॉर्म’ और ‘फीकल कोलीफॉर्म’ बैक्टीरिया की अत्यधिक मात्रा दर्ज की गई है, जो गंभीर सीवेज प्रदूषण का संकेत है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में नदी का पानी पीने योग्य नहीं रह जाता और बिना शोधन के उसमें स्नान करना भी स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है, जिससे जलीय जीव-जंतुओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शर्मा ने बताया कि उनकी मुहिम को अच्छा समर्थन मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि संगठन से जुड़ने वालों को ‘कॉकरोच’ की तस्वीर वाला पहचान पत्र जारी किया जा रहा है।

समाजसेवी के अनुसार अब तक लगभग 800 लोग इस अभियान से जुड़ चुके हैं। हालांकि, इस पहल को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं।

लखनऊ के अधिवक्ता अंकुर सक्सेना ने इसे सोशल मीडिया आधारित राजनीतिक अभियान करार देते हुए इसकी आलोचना की।

वहीं, राष्ट्रीय किसान मोर्चा के अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा कि किसान भी उपेक्षा का सामना कर रहे हैं और इस प्रतीकात्मक आंदोलन से स्वयं को जोड़ सकते हैं।

शर्मा ने स्पष्ट किया कि सीजेपी एक गैर-राजनीतिक आंदोलन है और उसका उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं बल्कि व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और स्वच्छ बनाना है। भाषा अरुणव सलीम जितेंद्र

जितेंद्र


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