उप्र की मुस्लिम, हिंदू राजपूत, गुर्जर समीकरण वाली 100 विधानसभा सीट पर रहेगी नजर: बासित अली
उप्र की मुस्लिम, हिंदू राजपूत, गुर्जर समीकरण वाली 100 विधानसभा सीट पर रहेगी नजर: बासित अली
लखनऊ, 19 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अल्पसंख्यक मोर्चे के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा है कि वह पूरे देश और खासकर निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव से गुजरने जा रहे उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में ‘हकीकत’ को सामने रखकर मुसलमानों की भाजपा से दूरी को खत्म करने की कोशिश करेंगे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले अली ने कहा कि उत्तर प्रदेश के आगामी अहम विधानसभा चुनाव में उनका खास ध्यान मुस्लिम और हिंदू राजपूत, गुर्जर, जाट और त्यागी मतदाताओं के दबदबे वाली 100 विधानसभा सीट पर रहेगा।
अली ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि देश के विभिन्न राज्यों के मुद्दे और राजनीतिक समीकरण अलग-अलग हैं, लिहाजा वह तमाम राज्यों के भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्षों के साथ बड़ी बैठक करके भविष्य की रणनीति बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में उनका पूरा ध्यान उन राज्यों में मुस्लिम समाज को भाजपा से जोड़ने पर होगा जहां निकट भविष्य में विधानसभा के चुनाव होने हैं।
राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखने वाले अली ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वह मुस्लिम और हिंदू राजपूत, गुर्जर, जाट और त्यागी समुदाय के मतदाताओं के दबदबे वाली 100 विधानसभा सीट पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुस्लिम राजपूतों का इलाका उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश से सटा हुआ है और जहां-जहां हिंदू राजपूत हैं वहां मुस्लिम राजपूत की भी खासी आबादी है।
अली ने कहा कि मुस्लिम गुर्जर, मुस्लिम जाट और मुस्लिम त्यागी मूलत: खेती किसानी से जुड़े हैं और अपनी जमीन से प्यार करते हैं और उनका समन्वय सभी बिरादरियों से आसानी से बन जाता है लिहाजा दोनों ही धर्मों में इन बिरादरियों से ताल्लुक रखने वाले मतदाताओं का समीकरण उत्तर प्रदेश की 100 विधानसभा सीट पर असर डालता है और आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वह इन्हीं सीट पर विशेष ध्यान देंगे।
उत्तर प्रदेश में भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष रहे अली ने मुस्लिम समाज में भाजपा के प्रति भ्रम फैलाए जाने का दावा करते हुए कहा कि देश में मुसलमानों की आबादी लगभग 18 फीसद है लेकिन भाजपा सरकार की योजनाओं का लाभ पाने वालों में इस समुदाय की हिस्सेदारी 30 से 40 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम गरीब मुसलमानों तक इस हकीकत को ले जाएंगे और उस सोच को तोड़ेंगे कि भाजपा मुसलमानों की विरोधी है। हम उन्हें बताएंगे कि भाजपा ही उनकी वास्तविक हितैषी है जबकि विपक्षी दलों ने उन्हें सिर्फ ‘वोट बैंक’ के रूप में इस्तेमाल किया है और उन्हें उनकी हिस्सेदारी कभी नहीं दी।’’
अली ने कहा कि खासकर जिन गरीब मुसलमानों को पूर्व में शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिलता था उन्हें भाजपा ने प्रमुखता से लाभान्वित किया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम बहुल कुंदरकी और रामपुर जैसी विधानसभा सीट में भाजपा का सबसे बड़ा मुद्दा यही था कि उसकी सरकारों ने मुसलमानों को जो लाभ पहुंचाया है, चाहे मुफ्त राशन हो या उज्ज्वला गैस हो, वह पहले कभी नहीं दिया गया।
अली ने कहा कि पिछले विभिन्न चुनावों में भाजपा ने मुस्लिम बहुल इलाकों में खासी मुहिम चलायी थी और इसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है जिसके तहत कुंदरकी, संभल और रामपुर जैसी मुस्लिम प्रभुत्व वाली सीट पर मुसलमानों ने भाजपा को खासा वोट दिया है।
पूर्व में उत्तर प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष के तौर पर ‘स्नेह मिलन’ और ‘न दूरी है, न खाई है मोदी हमारा भाई है’ जैसे अभियान और कार्यक्रम चला चुके अली ने कहा कि वह अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव से गुजरने जा रहे राज्यों के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में ज्यादा से ज्यादा बैठकें करके अपनी बात रखेंगे।
उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न भाजपा शासित राज्यों में बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर मुसलमानों में भाजपा के प्रति नकारात्मक भावना बढ़ने को लेकर पूछे गए एक सवाल पर अली ने कहा कि देश में कानून सबके लिए बराबर है लेकिन अगर मुस्लिम समाज के किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है तो विपक्ष उसे हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा बनाकर गलत तरीके से पेश करता है।
मदरसों को निशाना बनाए जाने के विपक्ष के आरोपों पर अली ने कहा कि किसी भी मदरसे को निशाना नहीं बनाया गया है बल्कि अतिक्रमण के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि जो भी मदरसे वैध हैं वे अब भी चल रहे हैं और उन पर कोई आंच नहीं आएगी।
भाजपा ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले तय की गई अपनी राष्ट्रीय टीम में कुंवर बासित अली और तारिक मंसूर के रूप में दो मुस्लिम चेहरों को जगह दी है यह दोनों ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। इनके मनोनयन को प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में पश्चिमांचल को साधने की भाजपा की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
भाषा सलीम मनीषा सुरभि
सुरभि

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