उप्र: पति की आय संबंधी जानकारी देने का अनुरोध करने वाली पत्नी की याचिका को खारिज करने वाला आदेश रद्द

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उप्र: पति की आय संबंधी जानकारी देने का अनुरोध करने वाली पत्नी की याचिका को खारिज करने वाला आदेश रद्द

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  • Publish Date - March 30, 2026 / 10:05 PM IST,
    Updated On - March 30, 2026 / 10:05 PM IST

लखनऊ, 30 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने घरेलू हिंसा के मामले में पति की आय व संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करने की पत्नी की याचिका को खारिज करने वाले मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को रद्द कर दिया।

अदालत ने मजिस्ट्रेट को छह सप्ताह के भीतर पत्नी की याचिका पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया।

अदालत ने कहा कि भरण-पोषण व घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में आय का खुलासा करना महत्वपूर्ण है और मजिस्ट्रेट इस संबंध में आदेश जारी कर पति को उसकी आय व संपत्ति का विवरण देने के लिए बाध्य कर सकता है।

न्यायमूर्ति बृज राज सिंह की पीठ ने पत्नी और दंपति के नाबालिग बेटे की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत दायर याचिका पर यह आदेश जारी किया।

महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और आर्थिक शोषण का आरोप लगाते हुए घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत लखनऊ के प्रथम अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दायर की थी।

याचिकाकर्ता ने बीएनएसएस की धारा 91 के तहत पति को आयकर रिटर्न और अन्य वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत करने का आदेश देने का अनुरोध किया था।

मजिस्ट्रेट ने 19 जनवरी के एक आदेश में याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय का रुख किया।

पीठ ने सुनवाई के दौरान आयकर विभाग से पति के पिछले दो वर्षों के आयकर रिटर्न तलब किए।

रिकॉर्ड के अनुसार, पेशे से वास्तुकार पति की वार्षिक आय 4.85 लाख रुपये से 5.07 लाख रुपये के बीच है।

हालांकि, महिला के पति ने मजिस्ट्रेट की अदालत में खुद को मजदूर बताया

था।

उच्च न्यायालय ने राजनेश बनाम नेहा मामले में उच्चतम न्यायालय के 2021 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पति को अपनी आय और संपत्ति का खुलासा करने वाले दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा जा सकता है।

पीठ ने पति को अपनी पत्नी को अपने आयकर रिटर्न की एक प्रति प्रदान करने का भी आदेश दिया।

भाषा सं सलीम जितेंद्र

जितेंद्र