उप्र : बहराइच में घाघरा उफनाई, बरेली में बारिश से जनजीवन प्रभावित; रेल पटरियां डूबीं

उप्र : बहराइच में घाघरा उफनाई, बरेली में बारिश से जनजीवन प्रभावित; रेल पटरियां डूबीं

उप्र : बहराइच में घाघरा उफनाई, बरेली में बारिश से जनजीवन प्रभावित; रेल पटरियां डूबीं
Modified Date: September 7, 2026 / 09:05 pm IST
Published Date: September 7, 2026 9:05 pm IST

बहराइच/बरेली, सात सितंबर (भाषा) नेपाल के पहाड़ों से आ रहे पानी, बैराजों से छोड़े गए पानी और लगातार बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के बहराइच और बरेली जिलों में बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है।

बहराइच में घाघरा नदी के उफान से दो तहसीलों के एक दर्जन से अधिक मजरों में पानी भर गया है, जबकि बरेली में मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और रेलवे पटरियां पानी में डूब गईं।

बहराइच जिला प्रशासन के अनुसार, शारदा बैराज, घूर देवी और एल्गिन ब्रिज पर घाघरा (सरयू) नदी खतरे के लाल निशान से ऊपर बह रही है। नदी में छोड़े गए तीन लाख 78 हजार 800 क्यूसेक पानी के कारण सोमवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर, घूर देवी पर 30 सेंटीमीटर और शारदा बैराज पर 11 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया।

अपर जिलाधिकारी अमित कुमार ने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में अभी जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर नहीं है। हालांकि, महसी तहसील की एक ग्राम पंचायत के तीन मजरों और मिहींपुरवा तहसील की दो ग्राम पंचायतों के नौ मजरों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है।

उन्होंने बताया कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। तटीय क्षेत्रों के ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और आवश्यक सहायता पहुंचाई जा रही है तथा बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है।

महसी के उप जिलाधिकारी राजेश अग्रवाल ने बताया कि कुछ गांवों में बाढ़ और कुछ क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन सतर्क है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को बुलाया गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले दो दिनों में करीब दो दर्जन मजरों में पानी भर गया है। कई घरों में पानी घुस गया है और लोग मचान बनाकर रहने को मजबूर हैं। कुछ परिवारों को तख्तों पर खाना बनाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि मुख्य सड़क पर तीन दिन से पानी भरा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। लोग दवा लेने अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं और पशुओं के लिए चारे की समस्या भी उत्पन्न हो गई है।

मिहींपुरवा तहसील के कतर्नियाघाट जंगल से सटे गांवों में जलभराव के कारण वन्यजीवों के लिए भी संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, जंगल से सटे इलाकों में खतरनाक वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे लोगों में भय है।

वहीं, बरेली जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से हालात खराब हो गए हैं। बरेली जंक्शन की रेल पटरियां पानी में डूब गईं, जबकि सिटी स्टेशन पर भी ट्रैक पर पानी भरने से रेल यातायात प्रभावित हुआ।

शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। अलखनाथ मंदिर परिसर के शिवालय तक बारिश का पानी पहुंच गया। इसके अलावा मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय, कई सरकारी दफ्तरों, थानों और बिजलीघरों में भी पानी भर गया।

प्रशासन के अनुसार, पिछले 14 वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए बरेली में 24 घंटे के दौरान 134.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में स्थिति बिगड़ गई और जल निकासी व्यवस्था कई जगह प्रभावित हुई।

बरेली के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संतोष कुमार सिंह ने बताया कि लगातार बारिश के कारण रामगंगा नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। हालांकि, नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है, लेकिन प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने सोमवार को रामगंगा नदी में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नाव से नदी क्षेत्र का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उन्होंने तहसील मीरगंज के ग्राम कपूरपुर में रामगंगा नदी के बाएं किनारे स्थित प्राचीन रामगंगा मंदिर परिसर के पास चल रहे बाढ़ बचाव कार्यों का भी जायजा लिया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सुरक्षात्मक कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।

नगर निगम की टीमें जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के काम में जुटी हैं। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और स्थिति पर नजर रखने की अपील की है।

भाषा

सं, आनन्द रवि कांत


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