जालौन (उप्र), 20 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में तैनात आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सरकार को पत्र लिखकर राज्य के प्रशासनिक कामकाज के तरीके, पारदर्शिता और जवाबदेही के तंत्र पर सवाल उठाये और बमुश्किल चार घंटे ही काम होने की दलील देकर केवल आधा वेतन देने की मांग की है।
जालौन में उप जिलाधिकारी (न्यायिक) के पद पर तैनात भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी राही ने गत 15 जुलाई को नियुक्ति और कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव को लिखे एक विस्तृत पत्र में राज्य के प्रशासनिक तंत्र के लिए अपनी उपयोगिता का आकलन करने का अनुरोध किया।
राही ने कहा कि अगर उन्हें उपयुक्त पाया जाता है, तो उन्हें उनके बैच के अन्य अधिकारियों के बराबर जिम्मेदारियां सौंपी जानी चाहिए, नहीं तो सरकार को नियमों के अनुसार उन्हें किसी दूसरे राज्य कैडर में स्थानांतरित करने पर विचार करना चाहिए।
राही ने दावा किया कि जालौन में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने हर ग्राम पंचायत और शहरी इलाके के लिए व्हाट्सऐप समूह बनाए थे, जिनके जरिये नागरिकों, अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों को जोड़कर एक समयबद्ध एवं प्रमाण-आधारित सामाजिक ऑडिट प्रणाली स्थापित की थी।
अधिकारी के मुताबिक इस प्रणाली से क्षेत्र स्तरीय कर्मचारियों, जैसे कि ग्राम पंचायत सचिव, लेखपाल और सफाई कर्मचारी की उपस्थिति और कामकाज की निगरानी संभव हो पाई और साथ ही स्थानीय लोग कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के सुबूत भी सामने रख पाते थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि पारदर्शिता के लिये वरिष्ठ अधिकारियों से बार-बार गुजारिश करने के बावजूद कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक जानकारी जैसे कि क्षेत्र में तैनात कर्मियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड, लाभार्थियों की सूची, मनरेगा से जुड़े कार्यों का विवरण, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की सूची, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और निविदा से जुड़े दस्तावेज को सार्वजनिक नहीं किया गया।
राही ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण, अवैध खनन और सार्वजनिक शिकायतों से जुड़े मामलों की जांच करते समय उन्हें दबाव और विवाद का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन पर शिकायत निस्तारण की झूठी रिपोर्ट स्वीकार करने का दबाव बनाने की कोशिश की गयी।
जालौन में उप जिलाधिकारी (न्यायिक) के पद पर तैनात राही ने कहा कि उनके पास हर दिन मुश्किल से चार घंटे का ही काम होता है और इसी आधार पर उन्होंने अनुरोध किया है कि 22 जुलाई 2026 से उन्हें केवल आधी तनख्वाह ही दी जाए।
राही ने कहा कि वह ‘समान काम के लिए समान वेतन’ के नैतिक सिद्धांत में विश्वास करते हैं और बिना उचित काम के पूरा वेतन लेना उन्हें उचित नहीं लगता।
राही ने जिलाधिकारी के कार्यालय में शिकायत निवारण प्रणाली पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केवल शिकायतों का निपटारा करना काफी नहीं है बल्कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और स्थायी समाधान सुनिश्चित करना ही मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
हालांकि पत्र में लगाए गए आरोप राही के निजी दावे हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार या संबंधित विभागों की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
इस मामले पर टिप्पणी के लिए जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय से संपर्क करने की कोशिश की गयी लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
राही अक्सर भ्रष्टाचार को आक्रामक तरीके से उजागर करने और नियमों को चुनौती देने के कारण विवादों में रहे हैं।
राही वर्ष 2009 में प्रांतीय लोक सेवा (पीसीएस) अधिकारी के तौर पर मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात थे और करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश करने पर उन्हें सात गोलियां मारी गयी थीं लेकिन वह बच गये थे। हालांकि उनके चेहरे को गंभीर चोटें आयी थीं और उनकी एक आंख की रोशनी चली गयी थी।
बाद में, शाहजहांपुर में उपजिलाधिकारी के पद पर अपनी तैनाती के दौरान सफाई व्यवस्था को लेकर एक मुंशी से उठक-बैठक लगवाने पर शुरू हुए वकीलों के विरोध-प्रदर्शन को शांत करने के लिए उन्होंने सबके सामने उठक-बैठक की थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। इस घटनाक्रम के कुछ समय बाद उन्हें उक्त पद से हटा दिया गया था।
राही हाल ही में तब चर्चा में आए जब उन्होंने समुचित काम नहीं दिये जाने के कारण राष्ट्रपति को ‘तकनीकी इस्तीफा’ सौंपा था। हालांकि बाद में उन्हें जालौन में उपजिलाधिकारी के पद पर तैनाती दी गयी थी।
भाषा सं. आनन्द सलीम
धीरज
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