बलिया (उप्र), नौ जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के बलिया की एक अदालत ने राज्य सरकार द्वारा मामला वापस लेने के फैसले को स्वीकार करते हुये प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और 13 अन्य आरोपियों को 10 साल पुराने एक मामले में आरोपमुक्त कर दिया है। सिंह के खिलाफ यह मामला निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में था।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, यह मामला नौ सितंबर 2015 को बलिया सिटी कोतवाली में उप निरीक्षक सत्येंद्र राय की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (सरकारी निर्देशों की अनदेखी) के तहत सिंह, नागेंद्र पांडे और 17 नामजद लोगों के अलावा 100 से 150 अनजान लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था।
आरोपियों के खिलाफ शहर के मालगोदाम रोड पर धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा के बावजूद सड़क जाम करने, यातायात को अवरूद्ध करने और आवाजाही में रुकावट डालने का आरोप था।
अभियोजन अधिकारी वीरपाल सिंह ने शुक्रवार को बताया कि राज्यपाल की तरफ से वाद वापस लेने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान की गई थी, जिसके परिप्रेक्ष्य में न्यायालय में मामले को वापस लेने के लिये प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया।
मुकदमे की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायिक दंडाधिकारी अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने बुधवार को यह फैसला दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ने अपनी याचिका में मामले की कमियां बतायी थीं और कहा था कि इसके सफल होने के अवसर कम ही लग रहे हैं।
सिंह ने बताया कि अदालत ने यह भी कहा कि इस घटना में कथित अपराध के दौरान विरोध और प्रदर्शन भी शामिल था।
उन्होंने कहा कि तथ्य और हालात को देखते हुए, अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष को मामला वापस लेने की इजाज़त देना सही है ।
अधिवक्ता ने कहा कि याचिका स्वीकार करते हुए, मजिस्ट्रेट ने कानून के हिसाब से मामला वापस लेने का आदेश दिया और सिंह एवं पांडे समेत अन्य आरोपियों को मामले में आरोपमुक्त कर दिया ।
भाषा रंजन मनीषा
मनीषा