उप्र : रक्षाबंधन पर जेलों में बहनों ने भाइयों को राखी बांधकर जल्द रिहाई की कामना की

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उप्र : रक्षाबंधन पर जेलों में बहनों ने भाइयों को राखी बांधकर जल्द रिहाई की कामना की

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  • Publish Date - August 28, 2026 / 09:43 PM IST,
    Updated On - August 28, 2026 / 09:43 PM IST

लखनऊ, 28 अगस्त (भाषा) अधिकांश परिवारों के लिए रक्षाबंधन घर पर मनाया जाने वाला त्योहार है, लेकिन उत्तर प्रदेश की जेलों में शुक्रवार को इसका अलग ही रूप देखने को मिला। सैकड़ों महिलाएं और बच्चे जेल में बंद अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच कतार में खड़े नजर आए।

सुलतानपुर जिला जेल पहुंचने पर कई बहनें अपने भाइयों को देखकर भावुक हो गईं। उन्होंने भाइयों की जल्द रिहाई और बेहतर भविष्य की कामना की।

भेटौरा निवासी नीतू ने बताया कि वह अपने भाई के लिए राखी और मिठाई लेकर आई हैं और ईश्वर से उसकी जल्द रिहाई की प्रार्थना की है। दोस्तपुर से आईं रूपा ने कहा कि भाई को इस हालत में देखकर दुख होता है।

मिश्रौली की ललिता ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें जेल आकर अपने भाई को राखी बांधनी पड़ेगी। एक अन्य महिला ने कहा कि वह अपने भाई की लंबी उम्र और सलामती की दुआ करने आई हैं, ताकि वह जल्द जेल से बाहर आकर सही रास्ते पर लौट सके।

सुलतानपुर जेल के अधीक्षक प्रांजल अरविंद ने बताया कि रक्षाबंधन पर 307 पुरुष बंदियों को राखी बांधने के लिए 478 महिलाएं और 103 बच्चे जेल पहुंचे। कार्यक्रम सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक चला।

उन्होंने बताया कि जिन महिलाओं के पास राखी नहीं थी, उन्हें जेल प्रशासन की ओर से राखी और रोली उपलब्ध कराई गई। बहनों के बैठने, पेयजल और बिस्कुट आदि की भी व्यवस्था की गई थी।

एटा से मिली जानकारी के अनुसार, जेल अधिकारियों ने बताया कि करीब 800 महिलाएं और 123 बच्चे अपराह्न तीन बजे तक जिला जेल पहुंचकर अपने भाइयों से मिल चुके थे। अधिकारियों ने कहा कि शाम तक आगंतुकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद थी।

जेल अधीक्षक अंकेक्षिता श्रीवास्तव ने कहा कि आगंतुकों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए पहले से ही व्यवस्था की गई थी। जेल के बाहर अवरोधक लगाए गए थे और आगंतुकों को कतार में प्रवेश दिया गया। पुलिस और जेल कर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभाली।

बहनों द्वारा भाइयों को राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और बेहतर भविष्य की कामना करने के दौरान माहौल भावुक हो गया।

उरई जेल के अधीक्षक प्रशांत मौर्य ने बताया कि जालौन की जिला जेल में 348 महिलाएं और 130 बच्चे 229 पुरुष बंदियों से मिलने पहुंचे। वहीं, 28 महिला बंदियों के भाई भी उनसे मिलने जेल पहुंचे।

प्रशासन ने आगंतुकों को बारिश से बचाने के लिए जलरोधक तंबुओं की व्यवस्था की थी। साथ ही मिठाई, रोली और चंदन का लेप भी उपलब्ध कराया गया।

अधिकारियों ने बताया कि जिन महिला बंदियों की बहनें उनसे मिलने नहीं आ सकीं, उनके लिए भी रक्षाबंधन मनाने की व्यवस्था की गई। ब्रह्माकुमारीज संगठन के सदस्यों को महिला बंदियों को राखी बांधने के लिए आमंत्रित किया गया था।

मौर्य ने बताया कि जेल में दोषियों और विचाराधीन कैदियों समेत कुल 630 कैदी हैं।

इस बीच, विधवा और परित्यक्त महिलाओं के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्था सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से वृंदावन और वाराणसी की पांच विधवा महिलाएं शुक्रवार को नयी दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पहुंचीं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राखी बांधी तथा उनके दीर्घायु एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

सुलभ इंटरनेशनल के अनुसार, वृंदावन के विभिन्न आश्रय स्थलों में रहने वाली इन महिलाओं ने प्रधानमंत्री के लिए अपने हाथों से 1,100 राखियां तैयार की थीं, जिन्हें उन्होंने प्रधानमंत्री को भेंट किया।

सुलभ इंटरनेशनल के जनसंपर्क प्रभारी मदन झा ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों की तरह इस वर्ष भी विधवा महिलाओं ने प्रधानमंत्री के लिए राखियां तैयार कीं और दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें भेंट किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने महिलाओं का हालचाल पूछा और उनका आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री से मिलने वाली महिलाओं में वाराणसी की शोभा अधिकारी और सोता देवी तथा वृंदावन की गीता दासी, पुष्पा अधिकारी और मेनका मंडल शामिल थीं।

गौरतलब है कि गैर-सरकारी संस्था सुलभ इंटरनेशनल जुलाई 2012 से उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर मथुरा-वृंदावन और वाराणसी में रहने वाली विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं के पुनर्वास, कल्याण और उनके जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है।

भाषा

सं, जफर रवि कांत