लखनऊ, 16 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गैंगस्टर अधिनियम के तहत एक रियल एस्टेट धोखाधड़ी गिरोह के सरगना और उसके साथी की 5.78 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त कर ली गई है।
इस गिरोह पर लोगों को ऐसी जमीनें बेचकर ठगने का आरोप है, जो या तो मौजूद ही नहीं थीं या फिर विवादित थीं।
यह कार्रवाई मोहनलालगंज इलाके में पुलिस आयुक्त अमरेंद्र सिंह सेंगर के निर्देश पर संगठित अपराध के खिलाफ जारी अभियान के तहत की गई।
लखनऊ पुलिस की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, जब्त की गई संपत्ति गिरोह के कथित सरगना प्रमोद कुमार उपाध्याय और उसके साथी विनोद कुमार उपाध्याय की है।
बयान के अनुसार, आरोपियों ने एक ऐसे संगठित गिरोह का संचालन किया, जिसके सदस्य प्रतिष्ठित रियल एस्टेट कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर आवासीय भूखंडों पर आकर्षक पेशकश कर लोगों को लुभाते थे।
बयान के मुताबिक, बाद में पता चला कि गिरोह के सदस्यों ने लोगों को ऐसी जमीनें बेचीं, जो या तो मौजूद ही नहीं थीं या फिर उन पर आरोपियों का मालिकाना हक नहीं था।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह ने खास तौर पर सशस्त्र बलों और अर्द्धसैनिक इकाइयों के जवानों को निशाना बनाया, क्योंकि दूर तैनाती की वजह से उनके मौके पर जाकर जमीन की जांच करने की संभावना कम थी।
बयान के अनुसार, साल 2020 से अब तक लखनऊ के अलग-अलग थानों में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और हत्या के प्रयास जैसे आरोपों में कुल 66 मामले दर्ज किए गए।
बयान में कहा गया है कि आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई सक्षम अदालत की ओर से छह अप्रैल को जारी आदेशों के बाद उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 14(1) के तहत की गई।
इसमें कहा गया है कि जब्त की गई संपत्तियों में लखनऊ की ओमैक्स सिटी में स्थित एक भूखंड और एक अर्द्धनिर्मित मकान शामिल है, जिनकी कुल कीमत 5.3 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है।
बयान के मुताबिक, इसके अलावा तीन कार भी जब्त की गई हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 45 लाख रुपये है।
बयान में कहा गया है कि पुलिस की टीमों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर उक्त संपत्तियों पर जब्ती के नोटिस लगाए और स्थानीय निवासियों को सूचित किया कि अब ये संपत्तियां अदालत के नियंत्रण में हैं।
भाषा
सलीम पारुल
पारुल