Owaisi Parliament Speech on Delimitation || Image- Sansad TV News
नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पारित करने के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया है। आज सत्र के पहले दिन तीनो ही विधेयकों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी देखने को मिली। सत्ता पक्ष के नेताओ अरु संसद सदस्यों ने जहां इस मुद्दे पर सरकार का समर्थन किया तो वही कांग्रेस से लेकर सपा और कई दुसरे विपक्षी दाल इसकी खिलाफत करते नजर आएं। (Owaisi Parliament Speech on Delimitation) इस बीच एआईएमआईएम के चीफ की तरफ से उठाये गए सवाल ने सबका ध्यान खींचा। संसद में दिए गए उनके बयान के अंश पर जमकर चर्चा हो रही है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक को पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह संघवाद का उल्लंघन करता है, जो भारतीय संविधान की मूल संरचना है। उन्होंने कहा कि, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल द्वारा पेश किए गए संवैधानिक संशोधन विधेयक का मुख्य लक्ष्य “दक्षिण पर शासन करना” है और इसका उद्देश्य “विधानमंडल से ओबीसी के प्रतिनिधित्व को मिटाना” है।
ओवैसी ने कहा, “मैं इस संवैधानिक संशोधन विधेयक के प्रस्तुतीकरण का विरोध करता हूं क्योंकि यह संसदीय लोकतंत्र और संघवाद के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, जो दोनों ही संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं। यह महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा नहीं है। (Owaisi Parliament Speech on Delimitation) इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण पर शासन करना और विधायिका से ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के प्रतिनिधित्व को पूरी तरह से मिटाना है।”
ओवैसी ने आंकड़े पेश करते हुए कहा, “संघवाद संविधान की मूल संरचना है। परिसीमन पर लगी रोक हटाने से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों को अधिक सीटें और शक्ति मिलती है, जबकि कम आबादी वाले क्षेत्रों को उचित आवाज से वंचित किया जाता है। यह एक बार फिर संघवाद का उल्लंघन है। हिंदी भाषी क्षेत्रों में 38.1 प्रतिशत सीटें हैं, जो बढ़कर 43.1 प्रतिशत हो जाएंगी। दक्षिणी राज्यों की सीटें 24 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत हो जाएंगी।” उन्होंने आगे कहा, “यह निर्देश का भी उल्लंघन है। मंत्री को इस सदन में विधेयक पेश करने के लिए सात दिन का नोटिस देना होता है। विधेयक की प्रतियां पेश करने से दो दिन पहले सदस्यों को भी दी जानी चाहिए। यह आरपीए 1951 की धारा 123 बी का स्पष्ट उल्लंघन है। मतदान से एक सप्ताह पहले, मैं इसे भ्रष्टाचार का कृत्य कहता हूं।”
“उत्तर बनेंगे शासक, दक्षिण रहेगा शासित!” — Aimim Supremo Br @asadowaisi का परिसीमन बिल पर तीखा विरोध pic.twitter.com/m0nVLSBCwE
— Nawab Abrar (@nawababrar131) April 16, 2026
इसके बाद, मतदान का परिणाम घोषित किया गया जिसमें 251 मत पक्ष में और 185 मत विपक्ष में पड़े। इस तरह बहुमत संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश करने के पक्ष में था। इसके बाद तीन प्रमुख विधेयक संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक , 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए। (Owaisi Parliament Speech on Delimitation) संविधान संशोधन विधेयक का कार्यान्वयन 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के जनसंख्या-आधारित संशोधन से जुड़ा है। इसमें परिसीमन का प्रस्ताव है जिसका मकसद जनसंख्या और उसके घनत्व के आधार पर राज्यों में विधानसभाओं और लोकसभा के आकार और संरचना को बदलना है।
सरकार ने 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना बनाई है, जिसके लिए वह 2023 के अधिनियम में संशोधन और परिसीमन प्रक्रिया को 2027 की जनगणना से अलग करने के लिए संवैधानिक संशोधन लाएगी। सरकार ने लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और शेष 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं।
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