युवा सरपंच की छात्राओं को स्वच्छ माहवारी के बारे में जागरूक करने की नई पहल
युवा सरपंच की छात्राओं को स्वच्छ माहवारी के बारे में जागरूक करने की नई पहल
बलिया, 11 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक गांव की युवा सरपंच स्मृति सिंह यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं कि स्कूल जाने वाली लड़कियों को हर महीने मासिक धर्म के दौरान अपनी सेहत और पढ़ाई के साथ समझौता न करना पड़े।
रतसर कला की सरपंच सिंह ने बताया कि उन्हें यह जानकर पीड़ा हुई कि गांव की कई लड़कियां और महिलाएं मासिक धर्म के दौरान आज भी राख, गेहूं के डंठल और फटे-पुराने कपड़ों का इस्तेमाल कर रही थीं, क्योंकि वे सैनिटरी पैड खरीद नहीं सकती थीं या उन तक उनकी पहुंच नहीं थी।
इसके चलते कुछ लड़कियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा था और वे स्कूल नहीं जा पा रही थीं।
सिंह के मुताबिक इस समस्या का ज़मीनी स्तर पर समाधान करने के संकल्प के साथ उन्होंने कुछ महिला स्वास्थ्य कंपनियों के साथ मिलकर काम करना शुरू किया।
उनकी अपील पर एवरटीन ने ग्रामीण इलाकों में मासिक धर्म स्वच्छता शिविर आयोजित किया और सरकारी स्कूल, रतसर कला और सरकारी रतसर इंटर कॉलेज में पढ़ने वाली सैकड़ों लड़कियों को निशुल्क सैनिटरी पैड, पीरियड ट्रैकर, पीरियड कैलेंडर और माहवारी जागरूकता संबंधी सामग्री वितरित की।
इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की किशोर लड़कियों को सुरक्षित मासिक धर्म उत्पादों तक बेहतर पहुंच देना और उन्हें सम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपने मासिक धर्म का प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करना था।
सिंह ने कहा, ‘‘अपने इलाके की लड़कियों और महिलाओं से बात करने पर मुझे अहसास हुआ कि मासिक धर्म के दौरान, कई लड़कियों को मजबूरी में राख, गेहूं के डंठल और फटे-पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करना पड़ता है। इस वजह से, उन्हें मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने में मुश्किल होती है, सेहत से जुड़ी परेशानियां होती हैं और यहां तक कि उन्हें स्कूल भी छोड़ना पड़ता है। मैं दिल से एवरटीन को धन्यवाद देती हूं कि उसने मेरी अपील पर संज्ञान लिया और इन छात्राओं के लिए मुफ़्त सैनिटरी पैड, पीरियड ट्रैकर और पीरियड कैलेंडर भेजे।’’
पैन हेल्थकेयर के सीईओ चिराग ने कहा कि कंपनी को युवा सरपंच की पहल ने बहुत प्रेरित किया।
उन्होंने बताया,“जब हमने गाँव की युवा सरपंच स्मृति सिंह का ईमेल देखा, जिसमें उन्होंने अपने गाँव की लड़कियों के लिए मदद माँगी थी, तो हम अपनी कम्युनिटी में मासिक धर्म के दौरान साफ़-सफ़ाई के स्तर को बेहतर बनाने की उनकी सक्रिय कोशिशों से बहुत प्रेरित हुए।”
भाषा धीरज नरेश
नरेश

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