पेरिस, पांच जनवरी (एपी) पेरिस की एक अदालत ने फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिजिट मैक्रों के ऑनलाइन उत्पीड़न के मामले में सोमवार को 10 लोगों को दोषी ठहराया।
अदालत ने सभी दोषियों को ‘साइबरबुलिंग’ जागरूकता प्रशिक्षण से लेकर आठ महीने के निलंबित कारावास तक की सजा सुनाई।
ब्रिजिट मैक्रों को निशाना बनाकर कथित ट्रांसजेंडर पहचान और कथित बाल यौन शोषण अपराध के बारे में किए गए झूठे दावों का जिक्र करते हुए अदालत ने ‘‘विशेष रूप से अपमानजनक, आपत्तिजनक और दुर्भावनापूर्ण’’ टिप्पणियों की ओर इशारा किया।
दोषी ठहराए गए लोगों में 41 साल से 65 वर्ष की आयु तक के आठ पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। उन पर आरोप था कि उन्होंने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी के जन्म से पुरुष होने का झूठा दावा करते हुए ऑनलाइन ‘‘अनेक दुर्भावनापूर्ण टिप्पणियां’’ कीं तथा उनके पति एवं उनके बीच उम्र में 24 साल के अंतर का जिक्र करते हुए इसे बाल यौन शोषण करार दिया। इनमें से कुछ पोस्ट को हजारों बार देखा गया।
ब्रिजिट मैक्रों अक्टूबर में दो दिवसीय सुनवाई में शामिल नहीं हुईं। रविवार को राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल ‘टीएफ1’ पर उन्होंने कहा कि उन्होंने उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई में ‘‘एक उदाहरण पेश करने’’ के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू की है।
उनकी बेटी टिपेन औज़ियर ने गवाही देते हुए कहा कि ऑनलाइन उत्पीड़न बढ़ने के बाद से उनकी मां काफी परेशान रही हैं।
औज़ियर ने अदालत से कहा, ‘‘वह अपने बारे में कही गईं भयानक बातों को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं।’’ उन्होंने कहा कि इसका असर मैक्रों के पोते-पोतियों समेत पूरे परिवार पर पड़ा है।
मैक्रों दंपति की शादी 2007 में हुई थी। वे पहली बार हाईस्कूल में मिले थे, जहां मैक्रों छात्र थे और ब्रिजिट मैक्रों शिक्षिका थीं। अपने पति से 24 साल बड़ी ब्रिजिट उस समय ब्रिजिट औज़ियर कहलाती थीं और तीन बच्चों की विवाहित मां थीं।
इमैनुएल मैक्रों 48 साल के हैं और 2017 से फ्रांस के राष्ट्रपति हैं।
एपी नेत्रपाल नरेश
नरेश