अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार को ‘उग्रवादी मानसिकता’ से बाहर निकलना चाहिए: पाकिस्तान के मंत्री

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अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार को ‘उग्रवादी मानसिकता’ से बाहर निकलना चाहिए: पाकिस्तान के मंत्री

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 05:51 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 05:51 PM IST

(सज्जाद हुसैन)

इस्लामाबाद, 29 सितंबर (भाषा) पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने मंगलवार को कहा कि अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार को ‘उग्रवादी मानसिकता’ से बाहर निकलना चाहिए। मंत्री का यह बयान दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच आया है।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध हाल के महीनों में खराब हुए हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर उग्रवाद को समर्थन देने के आरोप लगा रहे हैं।

पाकिस्तान ने सोमवार को कहा था कि उसके सुरक्षा बलों ने अफगानिस्तान से लगे सीमावर्ती क्षेत्र में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए, जिसमें कई आत्मघाती हमलावरों समेत 28 आतंकवादी मारे गए।

ये ताजा हमले दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने का संकेत हैं। इस्लामाबाद लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि आतंकवादी समूह पाकिस्तान में हमलों के लिए अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करते हैं, जबकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इस आरोप को खारिज करती रही है।

तरार ने इस्लामाबाद में अफगानिस्तान और शांति की संभावनाओं पर आयोजित एक संगोष्ठी में कहा, “अंतरिम अफगान सरकार को उग्रवादी मानसिकता से निकलकर राजनेता या राष्ट्र की सोच अपनाने की जरूरत है।’’

तरार ने इसे ‘अफगान संकट या अफगान दुविधा’ बताते हुए कहा कि यह एक जटिल समस्या है, जिसके स्थायी और टिकाऊ समाधान की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान और अफगानिस्तान पहले भी पड़ोसी रहे हैं, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं, संबंध और संपर्क हैं, लेकिन हमारा अतीत उथल-पुथल भरा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांति और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करता है, लेकिन सवाल उठाया कि क्या मौजूदा हालात में शांति कायम रह सकती है। इसके बाद उन्होंने इस सवाल का खुद ही जवाब देते हुए कहा, ‘‘क्या शांति हासिल की जा सकती है? इसका जवाब हां में है। लेकिन क्या शांति हासिल करने की इच्छा है? दुर्भाग्य से इसका जवाब नहीं है।’’

तरार ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ सार्थक वार्ता के लिए कई प्रयास किए हैं। उन्होंने काबुल में उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के दौरों और कतर, तुर्किये एवं चीन जैसे मित्र देशों की ओर से किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने दावा किया कि ये प्रयास विफल रहे क्योंकि अफगानिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल उग्रवाद के लिए किए जाने को लेकर पाकिस्तान की एकमात्र चिंता का समाधान करने में विफल रहा।

भाषा संतोष माधव

माधव