युद्ध के बीच परिवार से बात नहीं कर पा रहे ईरानी समुदाय के लोग, भारी मन से मनाएंगे नवरोज

युद्ध के बीच परिवार से बात नहीं कर पा रहे ईरानी समुदाय के लोग, भारी मन से मनाएंगे नवरोज

युद्ध के बीच परिवार से बात नहीं कर पा रहे ईरानी समुदाय के लोग, भारी मन से मनाएंगे नवरोज
Modified Date: March 20, 2026 / 05:53 pm IST
Published Date: March 20, 2026 5:53 pm IST

पेरिस, 20 मार्च (एपी) ईरान में 2025 के अंत में जब देशव्यापी विरोध प्रदर्शन भड़क उठे, तो शायान गदीमी की मां पेरिस से ईरान लौट गईं ताकि वह स्वयं इस प्रदर्शन को देख सकें।

मां का ईरान जाना, उसके बाद हुई हिंसक कार्रवाई तथा अब ईरान युद्ध के बीच संपर्क बनाए रखने में परेशानी से पूरा परिवार दुखी है।

विदेश में रहने वाले कई ईरानियों की तरह गदीमी के परिवार के सदस्यों ने भी भारी मन से पारसी नववर्ष नवरोज नहीं मनाने का फैसला किया है।

गदीमी ने कहा कि उनकी 70 वर्षीय मां ने टीवी पर शुरुआती विरोध प्रदर्शन देखे थे।

रेस्तरां चलाने वाली गदीमी के अनुसार मां ने कहा था, ‘मैं वहां जाना चाहती हूं।”

गदीमी ने कहा, “अब वह (ईरान में) घर के अंदर बिल्कुल अकेली हैं, संपर्क बनाए रखने का कोई तरीका नहीं है। मैं नहीं जानता कि वह किस हाल में हैं।”

पेरिस में पिछले साल नवरोज के अवसर पर संगीत कार्यक्रम आयोजित करने वाले ईरानी सांस्कृतिक केंद्र ने कहा कि वह शोक में है। अमेरिका में कुछ ईरानी-अमेरिकी समुदायों ने भी उत्सवों को रद्द कर दिया है या बेहद सादगी से मनाने का फैसला किया है।

नवरोज का अर्थ नया दिन होता है। यह ईरान के अलावा अफगानिस्तान से लेकर तुर्किये तक मनाया जाता है। विभिन्न धार्मिक पृष्ठभूमि के ईरानी लोग नवरोज मानेत हैं। हालांकि कभी-कभी कट्टरपंथी इसे रोकने का प्रयास करते हैं।

नवरोज की खरीदारी के लिए बाहर गईं शकीबा एदीगोफर ने कहा कि वह और उनके ईरानी दोस्त युद्ध के बीच “एक तरह के भावनात्मक उथल-पुथल” से गुजर हैं । इजराइल और अमेरिका ईरान के नेताओं और सेना पर हमला कर रहे हैं, जबकि ईरान इजराइल और खाड़ी के अरब देशों पर मिसाइलें और ड्रोन दाग रहा है।

‘मेकअप आर्टिस्ट’ एदीगोफर ने कहा, “आप सुनते हैं कि ईरान के फलां नेता को खत्म कर दिया गया … फांसी दी गई या बमबारी हुई।”

संचार के अधिकांश साधन खत्म हो जाने के कारण, यह जानने की कोशिश करना कि परिवार और दोस्त बमबारी के बीच किस हाल में हैं, एक तनावपूर्ण अनुभव है।

एदीगोफर ने कहा, “मेरे एक दोस्त ने कुछ दिन पहले बहुत संक्षिप्त अवधि के लिए ‘इंस्टाग्राम’ पर संपर्क करने का प्रयास किया था। युद्ध शुरू हुए लगभग 20 दिन हो गए हैं, और मुझे लगता है कि वह वास्तव में एकमात्र मौका था जब मैं थोड़ी देर के लिए उससे बात कर पाई।”

एदीगोफर ने कहा कि परिवार और दोस्तों के साथ नवरोज मनाना “हमें मानसिक दबाव से कम से कम थोड़ी राहत पाने में मदद करता है।”

उन्होंने कहा, “इन सभी अत्याचारियों की सिर्फ यही इच्छा है कि हम उदास रहें, अपनी सहस्राब्दी पुरानी पारसी और ईरानी परंपराओं को भूल जाएं। हमें उन्हें जीतने नहीं देना है।”

गदीमी के रेस्तरां में भोजन करने आए कुछ लोगों ने उम्मीद जताई कि युद्ध एक नया सवेरा लेकर आएगा। वहीं, अन्य लोग इजराइल और अमेरिका के हमलों से हुई मौतों और विनाश को देख नहीं पा रहे।

उन्होंने कहा, “मेरे पास लोग आंसू बहाते हैं। कुछ लोग खुशी के आंसू बहाते हैं और कहते हैं, ‘क्या आपने देखा? वे आ रहे हैं। हम बचने वाले हैं।” और कुछ कहते हैं, “हमारा देश तबाह हो रहा है।”

जनवरी में गदीमी मां के ईरान लौटने के बाद उनसे अब तक केवल दो बार बात कर पाई हैं।

उन्होंने कहा, “सच कहूं तो अब मैं कोशिश नहीं करती। क्योंकि अगर मैं कॉल करूं और उनसे संपर्क न हो पाए तो मैं तनाव महसूस करती हूं। मेरी बहन दिन में 100 बार कॉल करती है लेकिन बात नहीं हो पाती।”

गदीमी की मां का वापसी का टिकट बुक कराया गया था और उन्होंने नवरोज पर लौटने का वादा किया था।

लेकिन जब गदीमी ने करीब एक हफ्ता पहले आखिरी बार बात की, तो उनकी मां ने कहा कि फिलहाल योजना बदल गई है। 1979 की इस्लामी क्रांति को देखने वालीं उनकी मां अब ईरान के अगले अध्याय को देखना चाहती हैं।

गदीमी की मां ने उनसे कहा है, “मैं अंत तक यहां रहूंगी।”

एपी जोहेब माधव

माधव


लेखक के बारे में