(कैरोल हैजवेल, द ओपन यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोफिजिक्स की प्राध्यापक )
लंदन, 12 जनवरी (द कन्वरसेशन) खगोल विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिक उस सवाल के जवाब के करीब पहुंच रहे हैं जो सदियों से पूछा जा रहा है कि क्या पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जहां जीवन मौजूद है?
पिछले तीन दशकों में यह स्पष्ट हो चुका है कि सूर्य अकेला तारा नहीं है, जिसके चारों ओर ग्रह घूमते हैं। अब तक छह हजार से अधिक एक्सोप्लैनेट यानि सौरमंडल के बाहर स्थित ग्रह खोजे जा चुके हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि दूरबीनों की मदद से इन ग्रहों के वायुमंडल में मौजूद गैसों का अध्ययन कर यह पता लगाया जा सकता है कि कहीं वहां जीवन के संकेत तो नहीं हैं।
ग्रह की अपने तारे से दूरी के आधार पर उसके तापमान का अनुमान लगाया जाता है। पृथ्वी की तरह तरल पानी के लिए अनुकूल तापमान को जीवन के लिए एक अहम शर्त माना जाता है और इसमें ग्रह का वायुमंडल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
खगोलविद अब सौरमंडल के बाहर स्थित ग्रहों के वायुमंडल में मौजूद अणुओं की पहचान करने में सक्षम हो गए हैं। प्रत्येक रासायनिक तत्व प्रकाश पर एक विशिष्ट ‘बारकोड’ जैसी छाप छोड़ता है। जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है, तो उसके वायुमंडल से छनकर आने वाले प्रकाश में इन अणुओं के संकेत देखे जा सकते हैं। हालांकि यह तकनीक केवल उन्हीं ग्रहों पर लागू होती है, जो हमारी दृष्टि से तारे के सामने से गुजरते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, किसी अणु की पहचान उसकी मात्रा और उसके बारकोड की मजबूती पर निर्भर करती है। पृथ्वी के वायुमंडल में नाइट्रोजन सबसे अधिक है, लेकिन इसका संकेत कमजोर होता है, जबकि ऑक्सीजन, ओजोन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प जैसे अणुओं के संकेत अपेक्षाकृत मजबूत होते हैं।
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (जेडब्ल्यूएसटी) ने इन्फ्रारेड तरंगदैर्घ्य में कई एक्सोप्लैनेट के वायुमंडल का अध्ययन किया है और मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा पानी जैसे सरल अणुओं की पहचान की है। हालांकि, आंकड़ों की व्याख्या में अंतर के कारण अलग-अलग शोध दल कभी-कभी अलग निष्कर्ष निकालते हैं।
वर्ष 2025 में पृथ्वी से बड़े लेकिन नेपच्यून से छोटे एक ग्रह ‘के2-18बी’ के वायुमंडल में डाइमिथाइल सल्फाइड पाए जाने का दावा किया गया था, जिसे संभावित जैविक संकेत माना गया। पृथ्वी पर यह गैस समुद्री सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पन्न होती है। हालांकि बाद के अध्ययनों ने इस दावे पर सवाल उठाए।
पृथ्वी जैसे छोटे, पथरीले ग्रहों के वायुमंडल का पता लगाना अभी कठिन है, लेकिन भविष्य के अंतरिक्ष मिशन इस दिशा में उम्मीद जगाते हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का ‘प्लेटो’ मिशन 2026 में प्रक्षेपित किए जाने की योजना है, जो पृथ्वी जैसे ग्रहों की पहचान करेगा। नासा का ‘नैन्सी ग्रेस रोमन’ टेलीस्कोप और ईएसए का ‘एरियल’ मिशन भी 2029 में लॉन्च होने की संभावना है।
इसके अलावा नासा की प्रस्तावित ‘हैबिटेबल वर्ल्ड्स ऑब्जर्वेटरी’ पृथ्वी जैसे लगभग 25 ग्रहों का अध्ययन करेगी और उनके वायुमंडल में ऑक्सीजन जैसे जीवन-संबंधी संकेतों की तलाश करेगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इन मिशनों के जरिए यह पता लगाने की दिशा में बड़ी प्रगति हो सकती है कि क्या ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन मौजूद है।
( द कन्वरसेशन ) मनीषा नरेश
नरेश