Chaitra Navratri 2026: जौ और नवरात्रि का अनोखा कनेक्शन! क्यों हर घर में बोया जाता है और क्या सच में ब्रह्म देव के आशीर्वाद का संकेत है?

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Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में माता की विधि-विधान से पूजा और व्रत किए जाते हैं। इस दौरान जौ बोए जाते हैं। यह समृद्धि और जीवन शक्ति का प्रतीक है और कहा जाता है कि इसका ब्रह्म देव से विशेष कनेक्शन है, जो घर में खुशहाली लाता है।

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  • Publish Date - March 13, 2026 / 12:49 PM IST,
    Updated On - March 13, 2026 / 12:49 PM IST

(Chaitra Navratri 2026/ Image Credit: IBC24 News)

HIGHLIGHTS
  • नवरात्रि में जौ बोना शुभ और मंगलकारी होता है।
  • जौ को अन्नपूर्णा देवी का स्वरूप माना जाता है।
  • ब्राह्मण कथाओं में जौ संसार का पहला अन्न माना गया।

Chaitra Navratri 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में नवरात्रि बेहद पावन और विशेष पर्व माना जाता है। साल में चार बार नवरात्रि पड़ती है, जिनमें चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। चैत्र नवरात्रि चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होती है और इसी दिन हिंदू नववर्ष का आरंभ भी होता है। इस साल यह पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को राम नवमी के दिन समाप्त होगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार, चैत्र नवरात्रि में देवी दुर्गा अवतरित हुई थी और उन्होंने दैत्य महिषासुर का वध किया था।

नवरात्रि में जौ बोने की परंपरा

नवरात्रि में पूजा और व्रत के साथ जौ बोने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जौ बोना शुभ और मंगलकारी माना जाता है। जौ को अन्नपूर्णा देवी का स्वरूप भी माना जाता है और इसे ‘जौ जयंती’ कहा जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि में जौ नहीं बोए जाएं तो पूजा पूरी नहीं होती। जौ का अंकुरण घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे हर घर में नवरात्रि के दौरान लगाया जाता है।

ब्रह्मा जी और जौ का संबंध

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जौ संसार का पहला अन्न है और इसे ब्रह्मा जी का स्वरूप भी माना गया है। ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना के समय सबसे पहले जौ उत्पन्न किए थे। यही कारण है कि इसे पूर्णसस्य यानी पूरी फसल कहा जाता है। जौ ऋषियों का प्रिय अनाज माना गया है और यही वजह है कि इसे नवरात्रि में विशेष महत्व दिया गया है।

जौ बोने की विधि

नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ जौ बोने की प्रक्रिया शुरू होती है। सबसे पहले एक साफ मिट्टी का बर्तन लें और उसमें पवित्र मिट्टी भरें। इसके बाद जौ के दाने बो दें और हल्के हाथ से पानी छिड़कें ताकि मिट्टी हमेशा नम रहे। इस पात्र को मां दुर्गा की प्रतिमा के पास रखें और रोजाना थोड़ा-थोड़ा पानी दें। समय पर अंकुरित जौ घर में सुख-समृद्धि और आशीर्वाद का संकेत देता है।

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नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं?

यह शुभ और मंगलकारी माना जाता है और घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली लाने के लिए बोया जाता है।

जौ का ब्रह्मा जी से क्या संबंध है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार जौ संसार का पहला अन्न है और इसे ब्रह्मा जी का स्वरूप माना जाता है।

कौन सा दिन जौ बोना शुरू किया जाता है?

नवरात्रि के पहले दिन, घट स्थापना के साथ जौ बोने की प्रक्रिया शुरू होती है।

जौ बोने की सही विधि क्या है?

साफ मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डालें, जौ बोएं, हल्का पानी छिड़कें और मां दुर्गा की प्रतिमा के पास रखें।