बांग्लादेश : अभियोजन पक्ष ने अपदस्थ प्रधानमंत्री हसीना के लिए मृत्युदंड की मांग की
बांग्लादेश : अभियोजन पक्ष ने अपदस्थ प्रधानमंत्री हसीना के लिए मृत्युदंड की मांग की
ढाका, 16 अक्टूबर (भाषा)बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के मुख्य लोग अभियोजक ने पिछले सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों के लिए बृहस्पतिवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मृत्युदंड देने की मांग की।
उन्होने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों की हसीना ‘मास्टरमाइंड और प्रमुख सूत्रधार’’थीं।
हसीना (78) के खिलाफ बांग्लादेश में कई मुकदमे चल रहे हैं। पिछले साल अगस्त में देश में बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन के बाद उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच हसीना सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के दौरान 1,400 लोग मारे गए थे।
बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस ने मुख्य अभियोजक मुहम्मद ताजुल इस्लाम के हवाले से खबर दी, ‘‘शेख हसीना सभी अपराधों की मास्टरमाइंड हैं। वह अपने कृत्यों पर अफसोस नहीं करने वाली क्रूर अपराधी हैं। वह अधिकतम सजा की हकदार हैं। मृत्युदंड के मामले में उनके प्रति कोई दया नहीं दिखाई जानी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘1,400 लोगों की हत्या के लिए उन्हें 1,400 बार फांसी दी जानी चाहिए। चूंकि वह संभव नहीं है, इसलिए न्याय की स्थापना हेतु अधिकतम दंड देना उचित है, ताकि भविष्य में कोई भी अपने ही देश के नागरिकों की इस तरह हत्या न कर सके।’’
हसीना के समर्थकों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। वहीं, अपदस्थ प्रधानमंत्री की ओर से अबतक इस घटनाक्रम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मुख्य अभियोजक ने तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी अधिकतम सजा देने की मांग की है। उन्हें जुलाई-अगस्त के सामूहिक विद्रोह को दबाने के लिए जिम्मेदार ‘चार लोगों के गिरोह’ में से एक बताया गया। इस्लाम ने कहा कि उनके प्रति कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-ममून के संबंध में उचित निर्णय लेना न्यायाधिकरण पर निर्भर है। ममून पहले ही अपना अपराध स्वीकार कर चुके हैं और सरकारी गवाह बन गए हैं।
हसीना पिछले साल पांच अगस्त को देश में अशांति के बीच भारत चली आईं । बताया जाता है कि कमाल ने भी पड़ोसी देश में शरण ली है।
भाषा धीरज पवनेश
पवनेश


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