( जोआना पॉजुलो, कार्लटन यूनिवर्सिटी )
ओटावा, नौ जनवरी (द कन्वरसेशन) “ब्लू मंडे” को भले ही साल का सबसे उदास दिन कहा जाता रहा हो, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह महज एक मिथक है। हालांकि, सर्दियों के मौसम में उदासी, थकान और ऊर्जा की कमी जैसी भावनाएं वास्तविक हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वर्ष 2005 में मनोवैज्ञानिक क्लिफ अर्नाल ने ब्रिटेन की एक ट्रेवल एजेंसी के प्रचार अभियान के दौरान “ब्लू मंडे” शब्द गढ़ा था। एक कथित वैज्ञानिक फार्मूले के आधार पर जनवरी के तीसरे सोमवार को साल का सबसे उदास दिन बताया गया। बाद में इसे खारिज कर दिया गया, लेकिन ठंडे और कम रोशनी वाले मौसम से जुड़ी मानसिक परेशानियां हकीकत हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ‘सीजनल अफेक्टिव डिस्ऑर्डर’ (एसएडी) अवसाद का एक मान्यता प्राप्त रूप है, जो मौसम में बदलाव से जुड़ा होता है। इसके लक्षणों में थकान, चिड़चिड़ापन, भूख में बदलाव, रुचि की कमी और निराशा की भावना शामिल हैं। कनाडाई मनोवैज्ञानिक संघ के अनुसार, लगभग 15 प्रतिशत कनाडाई नागरिकों में एसएडी के कुछ लक्षण पाए जाते हैं।
माना जाता है कि यह समस्या सूरज की रोशनी के कम संपर्क के कारण होती है, जिससे शरीर की जैविक घड़ी यानी ‘सर्कैडियन रिद्म’ प्रभावित होती है। इससे नींद और हार्मोन के संतुलन पर असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए कुछ वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय अपनाए जा सकते हैं। घर में आरामदायक माहौल बनाना, जैसे गर्म कंबल, किताब और गर्म पेय के साथ पढ़ने का कोना तैयार करना, अपनी स्वयं की देखभाल करने में मदद करता है। वर्तमान में जीने और भावनाओं को बिना सोचे-समझे स्वीकार करने की आदत भी लाभकारी है।
मनोवैज्ञानिक एवं लेखिका कारी लीबोविट्ज़ के अनुसार, सर्दियों को लेकर नजरिया बदलना अहम है। जिन संस्कृतियों में सर्दियों को सकारात्मक रूप में देखा जाता है, वहां लोग इस मौसम को आराम और पुनर्जीवन का अवसर मानते हैं। नकारात्मक भाषा के बजाय सर्दियों को विश्राम और ऊर्जा जुटाने का समय मानने से मनोबल बढ़ सकता है।
विशेषज्ञ हल्की सर्दी में सीमित समय के लिए बाहर जाने की सलाह भी देते हैं। दिन के समय, खासकर सुबह और दोपहर में धूप लेना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, ठंड में सावधानी जरूरी है, क्योंकि इससे हृदय संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
घर के भीतर पर्याप्त रोशनी, ‘डे-लाइट’ बल्ब का उपयोग और खिड़की के पास बैठकर काम या पढ़ाई करना भी मूड बेहतर कर सकता है। इसके अलावा, बुनाई, पेंटिंग, बोर्ड गेम, खाना पकाने और किताबें पढ़ने जैसी गतिविधियां मानसिक सुकून देती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी का मौसम स्वाभाविक रूप से ‘धीमा’ होने, आराम करने और खुद को फिर से तैयार करने का समय है। इस दौरान अधिक काम का दबाव कम करना, नींद का ध्यान रखना और कम ऊर्जा को सामान्य मानकर स्वीकार करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।
( द कन्वरसेशन ) मनीषा सुरेश
सुरेश