मेलबर्न, 30 जुलाई (एपी) ऑस्ट्रेलिया के एक सार्वजनिक पुस्तकालय को एक किताब लगभग 150 साल की देरी के बाद लौटाई गई है और पुस्तकालय के पास उस व्यक्ति का पता लगाने का कोई जरिया नहीं है, जिसने यह पुस्तक ली थी। पुस्तकालय अध्यक्ष ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
किआमा पुस्तकालय की प्रबंधक मिशेल हडसन ने बताया कि 1858 में प्रकाशित पुस्तक ‘एंटीक्विटीज ऑफ एथेंस’ को पिछले हफ्ते समुद्र तटीय शहर किआमा के एक पुस्तकालय में किसी व्यक्ति ने लौटाया। व्यक्ति को हाल ही में घर की मरम्मत के दौरान एक बंद चिमनी के अंदर ईंटों से बनी चाय की पेटी के अंदर यह पुस्तक मिली।
हडसन ने कहा, ”हमारे पास इतनी पुरानी कोई भी किताब कभी वापस नहीं आई है।”
उन्होंने कहा कि वह सोशल मीडिया पर कई पुस्तकालयों को ‘फॉलो’ करती हैं और अक्सर घर या संपत्तियों की सफाई के दौरान 30 या 40 साल पुरानी किताबें वापस मिलने की घटनाएं सामने आती हैं।
जिस व्यक्ति को यह किताब मिली थी, उसने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के संदेश का तुरंत जवाब नहीं दिया।
हडसन के अनुसार, महंगाई को ध्यान में रखते हुए इस किताब पर करीब 28,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 19,500 अमेरिकी डॉलर) का विलंब शुल्क बनता है। यह गणना किताब के अंदर छपे उस नियम के आधार पर की गई है, जिसमें 1872 में पुस्तकालय खुलने के समय प्रति सप्ताह तीन पेंस (ब्रिटिश मुद्रा) का शुल्क निर्धारित था।
हालांकि हडसन ने कहा कि उस आखिरी उधारकर्ता का पता लगाने का कोई जरिया नहीं है जिस पर यह बकाया (जुर्माना) था। 1870 के दशक की वह लाइब्रेरी जर्नल, जिसमें यह दर्ज होता था कि किसने कौन सी किताब कब उधार ली थी, वह खो चुका है।
उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य से हमारे पास एक कड़ी गायब है। किताब में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे पता चल सके कि इसे आखिरी बार किसने लिया था।’
वर्ष 1870 के दशक के पुस्तकालय नियमों के अनुसार, कोई व्यक्ति दूसरी किताब तभी ले सकता था, जब वह पहले ली गई किताब लौटाकर बकाया जुर्माना चुका देता।
हडसन ने कहा, ‘शायद यही वजह रही होगी कि उन्होंने इसे कभी वापस नहीं किया।’
अब इस किताब को पुस्तकालय के स्थानीय इतिहास संग्रह में प्रदर्शित किया जाएगा।
हडसन ने कहा, ‘हम इसे दोबारा जारी नहीं करेंगे। हम नहीं चाहते कि इस किताब की वापसी के लिए फिर से 150 साल इंतजार करना पड़े।’
एपी
शुभम पवनेश
पवनेश