काहिरा, 30 जुलाई (एपी) कुवैत की सेना ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईरान के एक हमले में एक चीनी कंपनी की इमारत निशाना बनी, जिसमें एक कर्मचारी की मौत हो गई।
सेना ने कहा कि हमले में उत्तरी कुवैत स्थित इमारत को गंभीर नुकसान पहुंचा है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई पांच मिसाइलों को मार गिराया।
इससे पहले, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के खिलाफ ‘‘बड़े हवाई हमलों’’ की सैन्य कार्रवाई पूरी कर ली है। ये हमले जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर पहले हुए ईरानी मिसाइल हमले के जवाब में किए गए। जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘पेट्रा’ के अनुसार, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि दो घंटे से अधिक समय तक चले अभियान के दौरान अमेरिकी सेना ने ईरान के ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ के 12 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें सैन्य कमान केंद्र, मिसाइल एवं ड्रोन ठिकाने तथा तटीय निगरानी और रक्षा स्थल शामिल थे।
ये हमले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के कुछ घंटे बाद किए गए जिसमें उन्होंने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैनिकों वाले एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाए जाने के बाद ईरान पर ‘‘बहुत कड़ा प्रहार’’ करने का संकल्प जताया था।
ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित केश्म द्वीप पर हुए हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए।
अमेरिका और सऊदी अरब द्वारा बुधवार को इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए जाने के बाद यह नया मिसाइल हमला हुआ। इन हमलों में कम से कम 20 लड़ाके और ईरान के छह सैन्य सलाहकार मारे गए।
मिस्र के एक बंदरगाह पर प्राकृतिक गैस ले जा रहे दो जहाजों में आग लगने की भी सूचना मिली है।
इस बीच, ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा कंपनी ‘एम्ब्रे’ के अनुसार, मिस्र के दमियाता बंदरगाह पर ड्रोन हमलों के कारण प्राकृतिक गैस ले जा रहे दो जहाजों में आग लग गई।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका कि अमेरिका के स्वामित्व वाले एक तैरते भंडारण केंद्र और यूनान के स्वामित्व वाले एक टैंकर पर किए गए इन हमलों के लिए कौन जिम्मेदार था। इस दौरान किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
कई दिनों तक अपेक्षाकृत शांति रहने के बाद विभिन्न मोर्चों पर फिर से हिंसा भड़कने से पूर्ण युद्ध की वापसी का खतरा बढ़ गया है।
मिस्र के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि दोनों जहाजों में ड्रोन हमले के कारण आग लगी।
अमेरिका का करीबी सहयोगी और क्षेत्रीय मध्यस्थ मिस्र पश्चिम एशिया के उन कुछ देशों में शामिल है, जो इस युद्ध के दौरान अब तक सीधे सैन्य हमलों का शिकार नहीं हुए है। यदि यह पुष्टि होती है कि हमला ईरान या उसके सहयोगियों ने किया है तो इसे संघर्ष के दायरे के बड़े विस्तार के रूप में देखा जाएगा।
सऊदी अरब ने पिछले दो दिन में उसके तेल प्रतिष्ठानों पर हुए ड्रोन हमलों के लिए इराकी मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है।
इस बीच, एक अधिकारी ने बताया कि सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने बुधवार को ट्रंप और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस से अलग-अलग मुलाकात की।
नए सिरे से तनाव भड़कने से पहले मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने को लेकर आशा जताई थी। हालांकि, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण हाल के सप्ताहों में अंतरिम समझौता विफल हो गया है। ईरानी हमलों के चलते यह रणनीतिक समुद्री मार्ग एक बार फिर प्रभावी रूप से बंद हो गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि मध्यस्थ ‘अब भी दोनों पक्षों के साथ संपर्क में हैं’ ताकि तनाव कम किया जा सके और युद्धविराम को फिर से पटरी पर लाया जा सके। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इस दिशा में कोई प्रगति हुई है या नहीं।
एपी आशीष नरेश
नरेश