ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने बैसाखी पर सिख विरोधी नफरत से निपटने में एकता का किया आह्वान
ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने बैसाखी पर सिख विरोधी नफरत से निपटने में एकता का किया आह्वान
(अदिति खन्ना)
लंदन, 14 अप्रैल (भाषा) ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने कहा है कि वह ब्रिटेन के समुदायों के भीतर विभाजनकारी आवाजों को चुनौती देने और बढ़ती सिख विरोधी नफरत से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सोमवार शाम को यहां 10 डाउनिंग स्ट्रीट में आयोजित बैसाखी के स्वागत समारोह में, स्टार्मर ने विभाजनकारी शक्तियों के खिलाफ एकजुट होने के अपने संदेश में पश्चिम एशिया संघर्ष के उथल-पुथल का उल्लेख किया।
उन्होंने सेवा की अवधारणा और लेबर पार्टी के मूल्यों के बीच समानता होने का दावा करते हुए कहा कि उनकी सरकार सेवा के प्रति समर्पित है।
पूरे देश से आए ब्रिटिश सिखों, सांसदों और समुदाय के नेताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने कहा, ‘‘सिखों का इतिहास ब्रिटिश इतिहास है।’’
उन्होंने कहा,“यही हमारी राष्ट्र की पहचान है। जब लोग हमें बांटने की कोशिश करते हैं, तो हमें बार-बार इस बात को दोहराना होगा। यही ब्रिटिश होने का मतलब है। हमारा यह समावेशी तरीका है और हमें इस पर बहुत गर्व है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बैसाखी उत्सव तो है ही, लेकिन साथ ही यह अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना भी है क्योंकि हमारे समुदायों और राजनीति में ऐसी आवाजें हैं जो हमें बांटना चाहती हैं और वे ऐसा करने के लिए किसी भी अवसर का उपयोग करेंगी।”
विभाजनकारी आवाजों के खिलाफ समुदायों से ‘एकजुट होने’ की अपील करते हुए स्टार्मर ने स्वीकार किया कि देश में सिख विरोधी नफरत बढ़ी है।
उन्होंने कहा, “हम हर प्रकार की सिख विरोधी नफरत के खिलाफ दृढ़ता से खड़े हैं। हमें इस पर कार्रवाई करनी होगी। मैं चाहता हूं कि भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों में यह कह पाऊं कि सिख विरोधी नफरत कम हो गई है, जहां यह मुद्दा ही न बने। लेकिन जब तक वह समय नहीं आता, तबतक हमें एक साथ मिलकर लड़ना होगा और इस विभाजन और विषैले अलगाव को फैलाने वाली आवाज़ों को चुनौती देनी होगी और उन्हें जवाबदेह ठहराना होगा।”
प्रधानमंत्री ने इतिहास की एक प्रमुख ब्रिटिश सिख हस्ती, राजकुमारी सोफिया दुलीप सिंह की उपलब्धियों पर आधारित एक नई प्रदर्शनी पर जिक्र किया, जिसका उद्घाटन पिछले महीने लंदन के केंसिंग्टन पैलेस में हुआ था।
‘द लास्ट प्रिंसेस ऑफ पंजाब’ नामक यह प्रदर्शनी महाराजा दलीप सिंह की बेटी की भूमिका पर प्रकाश डालती है, जिन्होंने महिलाओं के मताधिकार के लिए अभियान चलाया था।
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश

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