जलवायु परिवर्तन से आगामी दशकों में गर्मियों के दौरान वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो सकती है: अध्ययन

जलवायु परिवर्तन से आगामी दशकों में गर्मियों के दौरान वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो सकती है: अध्ययन

जलवायु परिवर्तन से आगामी दशकों में गर्मियों के दौरान वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो सकती है: अध्ययन
Modified Date: May 26, 2026 / 12:19 pm IST
Published Date: May 26, 2026 12:19 pm IST

( रेबेका कारिना सारी, वॉटरलू यूनिवर्सिटी )

वॉटरलू (कनाडा), 26 मई (द कन्वरसेशन) दुनिया भर में वायु प्रदूषण को किसी भी अन्य पर्यावरणीय जोखिम की तुलना में समय से पहले होने वाली अधिक मौतों से जोड़ा जाता है। इससे फेफड़ों के कैंसर, श्वसन संक्रमण, हृदय एवं फेफड़ों संबंधी बीमारियों तथा अन्य कारणों से मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

कनाडा जैसे देशों में भी, जहां वायु प्रदूषण को आमतौर पर कम जोखिम वाला माना जाता है, हर साल 17,000 से अधिक समयपूर्व मौतें और 140 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के आर्थिक नुकसान इससे जुड़े हैं।

भारी उद्योगों और जंगलों में लगने वाली आग से उत्पन्न प्रदूषण बाहरी हवा को इतना दूषित कर सकता है कि वह तत्काल स्वास्थ्य जोखिम पैदा करने लगती है। जलवायु परिवर्तन तापमान, हवाओं और वर्षा के स्वरूप में बदलाव के जरिए वायु गुणवत्ता को और खराब कर सकता है, जिससे प्रदूषकों का उत्सर्जन बढ़ता है, उनका रासायनिक रूपांतरण तेज होता है और वे अस्वास्थ्यकर स्तर तक जमा हो सकते हैं।

हाल में प्रकाशित हमारे शोध में मेरे सहयोगियों और मैंने अनुमान लगाया कि वर्ष 2100 तक अमेरिका में 10 करोड़ लोग गर्मियों के दौरान अस्वास्थ्यकर हवा में सांस लेने को मजबूर हो सकते हैं। यह संख्या वर्ष 2000 की तुलना में सात गुना अधिक होगी।

शोध के अनुसार यदि वायु को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो लोगों के सामने या तो घरों के भीतर रहने जैसे बचाव उपाय अपनाने अथवा बीमारी और मृत्यु के बढ़े हुए जोखिम का सामना करने का विकल्प होगा।

अध्ययन वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु, वायुमंडल और स्वास्थ्य संबंधी मॉडल पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जलवायु परिवर्तन के कारण वायु गुणवत्ता संबंधी चेतावनियां और स्वास्थ्य जोखिम संवेदनशील समूहों के लिए बढ़कर दोगुने तक हो सकते हैं।

शोध में कहा गया कि शिशु, छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं तथा हृदय एवं फेफड़ों की बीमारी, कैंसर, मधुमेह और मानसिक रोगों से पीड़ित लोग वायु प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। बाहर काम करने वाले और खुले में व्यायाम करने वाले लोगों को भी अधिक खतरा रहता है।

अध्ययन के मुताबिक यदि लोग वायु गुणवत्ता संबंधी चेतावनियों का पालन करें तो वे बाहरी प्रदूषण के संपर्क को कम कर सकते हैं। आमतौर पर ऐसी सलाह में बाहर कठिन शारीरिक गतिविधियों को सीमित करना, घर के भीतर की हवा को स्वच्छ रखना और अत्यधिक धुएं या कणों की स्थिति में एन95 या पी99 मास्क पहनना शामिल होता है।

हालांकि वर्तमान में अपेक्षाकृत कम लोग वायु गुणवत्ता चेतावनियों के प्रति जागरूक हैं और उससे भी कम लोग उनका पालन करते हैं। अमेरिका में केवल 15 से 20 प्रतिशत लोग साल में कम-से-कम एक बार अपने जोखिम को कम करने के लिए कुछ कदम उठाते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि जिन लोगों के पास अपने व्यवहार में बदलाव लाने के संसाधन नहीं हैं, उनके लिए चेतावनियों का पालन करना कठिन होता है। उदाहरण के लिए खुले में काम करने वाले मजदूरों और बेघर लोगों के पास स्वच्छ इनडोर स्थानों तक सीमित पहुंच होती है।

अध्ययन में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन का वायु गुणवत्ता पर प्रभाव इससे भी अधिक गंभीर हो सकता है क्योंकि शोध में जंगलों की आग में संभावित वृद्धि को शामिल नहीं किया गया। कनाडा में जंगलों की आग से निकलने वाला धुआं सूक्ष्म कणीय प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जंगलों में आग की घटनाओं को बढ़ावा देता है। वर्ष 2023 में कनाडा में लगी भीषण आग के कारण वहां के कई शहर उत्तरी अमेरिका के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार हुए थे और अमेरिका में भी कणीय प्रदूषण के कई रिकॉर्ड टूट गए थे।

अध्ययन में भविष्य की पर्यावरणीय नीतियों या विनियमन में ढील के प्रभावों को शामिल नहीं किया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार जलवायु परिवर्तन पिछले 50 वर्षों में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए बनाए गए नियमों से हासिल लाभ को आधा कर सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि जलवायु परिवर्तन को खतरनाक स्तर तक पहुंचने से रोकने वाली नीतियां अपनाई जाएं तो सदी के मध्य तक वायु गुणवत्ता चेतावनियों में वृद्धि को रोका जा सकता है और स्वास्थ्य जोखिमों में होने वाली अधिकतर बढ़ोतरी से बचा जा सकता है।

अध्ययन में कहा गया कि खराब वायु गुणवत्ता और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों से समान रूप से बचाव सुनिश्चित करने के लिए वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पैदा करने वाले उत्सर्जन को कम करना तथा लोगों की अनुकूलन क्षमता बढ़ाना आवश्यक होगा।

शोधकर्ताओं ने कहा कि यदि भविष्य में खराब हवा और चेतावनियां सामान्य हो जाती हैं, तो भवनों की वायुरोधी क्षमता, वेंटिलेशन, फिल्ट्रेशन प्रणाली और स्वच्छ इनडोर स्थानों तक पहुंच को बेहतर बनाना दीर्घकालिक अनुकूलन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

द कन्वरसेशन मनीषा वैभव

वैभव


लेखक के बारे में