समुदाय एआई को बना रहे है भाषाओं के संरक्षण का जरिया

समुदाय एआई को बना रहे है भाषाओं के संरक्षण का जरिया

समुदाय एआई को बना रहे है भाषाओं के संरक्षण का जरिया
Modified Date: September 30, 2026 / 04:52 pm IST
Published Date: September 30, 2026 4:52 pm IST

(एकातेरिना व्यलोमोवा एवं राफेल मेर्क्स, मेलबर्न विश्वविद्यालय )

मेलबर्न, 30 सितंबर (द कन्वरसेशन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को लेकर यह चिंता लगातार बढ़ रही है कि इससे सामाजिक और आर्थिक असमानता बढ़ सकती है। हालांकि, एआई भाषाई असमानता को भी बढ़ावा दे सकता है, क्योंकि जनरेटिव एआई के पीछे काम करने वाले बड़े भाषा मॉडल में कुछ भाषाओं का प्रतिनिधित्व बहुत अधिक है, जबकि कई अल्पसंख्यक भाषाएं लगभग गायब हैं।

जनरेटिव एआई बहुसंख्यक भाषाओं पर बेहतर काम करता है। इसके विपरीत, जिन भाषाओं की ऑनलाइन मौजूदगी बहुत कम है, उनके बारे में एआई मॉडल के पास पर्याप्त आंकड़े नहीं होते। इससे ऐसी भाषाओं में पूछे गए सवालों के गलत या अधूरे जवाब मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

पापुआ न्यू गिनी की हुला भाषा के करीब 10,000 भाषाभाषी हैं, जबकि तिमोर-लेस्ते में व्यापक रूप से बोली जाने वाली टेटुन भाषा के करीब 10 लाख से अधिक वक्ता हैं। दोनों भाषाओं का एआई मॉडल के प्रशिक्षण आंकड़ों में प्रतिनिधित्व बेहद कम है।

शोधकर्ताओं ने पिछले एक वर्ष में एक अलग प्रवृत्ति भी देखी है। एआई स्थानीय समुदायों को अपनी जरूरत के मुताबिक डिजिटल उपकरण बनाने में सक्षम बना रहा है, जिससे वे अपनी भाषाओं और ज्ञान को संरक्षित कर सकते हैं।

—– एआई की मदद से बने स्थानीय उपकरण —–

पापुआ न्यू गिनी की हुला भाषा के लिए बनाया गया ‘वावानागी’ ऐसा ही एक मंच है। इसे पूरी तरह हुला समुदाय ने एआई की मदद से तैयार किया है।

करीब 10,000 लोगों की इस भाषा के समुदाय के पास ऑनलाइन भाषा दस्तावेजीकरण मंच बनाने के लिए आम तौर पर जरूरी भाषाविदों और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की पर्याप्त संख्या नहीं है। इसके बावजूद समुदाय के सदस्यों ने एआई आधारित कोडिंग उपकरणों की मदद से वावानागी का डिजाइन, निर्माण और संचालन किया।

इस मंच के अब 80 से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जिन्होंने मिलकर अंग्रेजी-हुला के 12,000 से अधिक अनुवादों का योगदान दिया है। समुदाय का अंतिम लक्ष्य इतना आंकड़ा जुटाना है कि हुला भाषा का अनुवाद करने वाला ऐप तैयार किया जा सके।

इसी तरह ‘तुलुन’, तिमोर-लेस्ते में स्वास्थ्य शिक्षा सामग्री को टेटुन भाषा में अनुवाद करने में मदद करता है। स्थानीय गैर-सरकारी संगठन ‘मालुक तिमोर’ के साथ मिलकर तैयार यह मंच स्वास्थ्यकर्मियों को अपनी जरूरत के मुताबिक स्वीकृत शब्दों और वाक्यांशों की सूची बनाने की सुविधा देता है।

तुलुन एआई मॉडल की मदद से उपयोगकर्ताओं द्वारा अपलोड की गई सामग्री का अनुवाद करता है। इस तरह स्वचालित अनुवाद की प्रक्रिया एआई और टेटुन भाषा के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच सहयोग का रूप ले लेती है।

दक्षिण सूडान के अलियर मकोई अचूथ ने डिंका-अंग्रेजी शब्दकोश भी तैयार किया है। डिंका भाषा के करीब 50 लाख वक्ता हैं, लेकिन डिजिटल दुनिया में इसका प्रतिनिधित्व बहुत सीमित है। यह ऐप डिंका भाषी लोगों को शब्दों के अर्थ का अनुवाद और सत्यापन करने की सुविधा देता है और इस तरह भाषा के शब्द भंडार को बढ़ाने में मदद करता है।

अचूथ ने एआई की मदद से ऐप तैयार करने, उसका डेटा जुटाने और व्यवस्थित करने का काम किया। उनका कहना है कि वह किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के समस्या सुलझाने का इंतजार करने के बजाय व्यावहारिक समाधान तैयार करना चाहते थे।

—– समुदायों के हाथ में तकनीक —–

इन तीनों परियोजनाओं के उद्देश्य अलग हैं, लेकिन इनमें एक समानता है। ये एआई का इस्तेमाल स्थानीय ज्ञान को उसी भाषा और समुदाय में वापस पहुंचाने के लिए करती हैं।

वावानागी में हुला भाषा की बुजुर्गों द्वारा समीक्षा की जाती है, जो युवा पीढ़ी में टोक पिसिन भाषा के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कमजोर पड़ रही है। तुलुन में तिमोर-लेस्ते के स्वास्थ्य शिक्षक स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सामग्री को अपनी जरूरत के मुताबिक तैयार कर सकते हैं। डिंका-अंग्रेजी शब्दकोश समुदाय को शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच देता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, एआई इन उपकरणों को तैयार करने में लगने वाले समय और खर्च को इतना कम कर रहा है कि समुदाय बिना बाहरी वित्तीय मदद के भी अपने डिजिटल साधन बना सकते हैं और संचालित कर सकते हैं।

लेकिन यह धारणा भी चुनौती देती है कि कम आय वाले देशों या समुदायों में एआई का इस्तेमाल स्वाभाविक रूप से कम है। उदाहरण के लिए, केन्या और नाइजीरिया में एआई को अपनाने का स्तर अमेरिका के बराबर बताया गया है।

—– स्थानीय जरूरतों के लिए स्थानीय समाधान —–

ग्लोबल साउथ में एआई पर होने वाले शोध में अक्सर स्थानीय समुदायों को केवल एआई से प्रभावित होने वाले पक्ष के रूप में देखा जाता है। लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि तस्वीर इससे कहीं अधिक सकारात्मक और जटिल है।

उनके अनुसार, शोधकर्ताओं और वित्तीय सहायता देने वाली संस्थाओं के लिए यह स्थानीय समुदायों के नेतृत्व वाली परियोजनाओं को बढ़ावा देने का अवसर है। ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी समुदायों के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

चार्ल्स डार्विन यूनिवर्सिटी की कंप्यूटर वैज्ञानिक और आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाली कैट कुटे ने कहा कि कई समुदाय अब अपनी भाषा से जुड़ी तकनीक खुद विकसित कर रहे हैं, क्योंकि वे अपनी जरूरतों, संस्कृति और संभावनाओं को सबसे बेहतर ढंग से समझते हैं।

उनके अनुसार, जिस तरह आदिवासी समुदायों ने यात्रा की जरूरत के अनुसार मोटर कार को अपनाया, उसी तरह अब वे अनुवाद और कहानी कहने की अपनी जरूरतों के अनुसार एआई को अपना रहे हैं।

द कन्वरसेशन

मनीषा माधव

माधव


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