(के. जे. एम. वर्मा)
बीजिंग, चार जुलाई (भाषा) चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने पश्चिम एशिया संघर्ष में मध्यस्थता को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तुलना को शनिवार को खारिज करते हुए कहा कि देशों को स्वयं तय करना चाहिए कि ऐसा करना उनके हित में है या नहीं।
दोरईस्वामी ने वैश्विक नेतृत्व में भारत की भूमिका और ईरान-अमेरिका संघर्ष में मध्यस्थता के पाकिस्तान के प्रयासों के बारे में एक चीनी पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा, ‘‘अगर मैं थोड़ा स्पष्ट रूप से कहूं तो पाकिस्तान के साथ तुलना थोड़ा अनुचित है। मेरा मानना है कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं आपको बहुत कुछ बता देंगी।’’
दोरईस्वामी ने यहां चीन के सिंघुआ विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘विश्व शांति मंच’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमें देशों को इस आधार पर देखना चाहिए कि वे वास्तव में क्या हैं और वे व्यापक वैश्विक व्यवस्था में वास्तव में क्या कर रहे हैं।’’
दोरईस्वामी ने कहा, ‘‘दुनिया के साथ भारत का जुड़ाव उस स्तर पर है, जिसकी बराबरी अधिकतर देश नहीं कर सकते।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसमें यूरोपीय और एशियाई देशों के साथ आर्थिक एकीकरण का विचार तथा शांति एवं सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों में योगदान देने की हमारी इच्छा शामिल है।’’
दोरईस्वामी ने कहा, ‘‘हम यह सब करने के लिए तैयार हैं। जहां तक मध्यस्थता का सवाल है, तो प्रत्येक देश को यह तय करना है कि इससे उसकी व्यापक राष्ट्रीय स्थिति को कोई लाभ होता है या नहीं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने अतीत में अपनी ओर से ऐसा किया है।’’
उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इस समय इससे ‘‘हमें किसी खास तरह का लाभ होगा।’’
उन्होंने ईरान और यूक्रेन संघर्षों पर भारत एवं चीन के रुख के बीच समानता का उल्लेख करते हुए यह बात कही।
दोरईस्वामी ने कहा, ‘‘जहां तक मैं देखता हूं, पश्चिम एशिया और यहां तक कि पूर्वी यूरोप में हाल के संकटों पर हमारा रुख चीन के रुख से काफी मिलता-जुलता रहा है।’’
राजदूत ने कहा कि उन्हें चीन या भारत में से कोई भी देश ‘‘वास्तव में आगे बढ़कर मध्यस्थता की पेशकश करता’’ नहीं दिखता।
दोरईस्वामी ने इससे पहले संरक्षणवाद और वैश्विक शासन विषय पर चर्चा में भाग लिया।
भाषा सिम्मी रंजन
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