‘पोकेमॉन’ की पोशाक पहने प्रदर्शनकारियों ने कोयला परियोजनाओं का वित्त पोषण बंद करने का आह्वान किया

‘पोकेमॉन’ की पोशाक पहने प्रदर्शनकारियों ने कोयला परियोजनाओं का वित्त पोषण बंद करने का आह्वान किया

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  • Publish Date - November 15, 2025 / 08:44 PM IST,
    Updated On - November 15, 2025 / 08:44 PM IST

बेलेम (ब्राजील), 15 नवंबर (एपी) ब्राजील के बेलेम में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी30) के आयोजन स्थल के बाहर शुक्रवार को ‘पोकेमॉन’ की पोशाक पहने प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए और जापान सरकार से दक्षिण-पूर्व एशिया तथा ‘ग्लोबल साउथ’ के अन्य क्षेत्रों में कोयला एवं प्राकृतिक गैस परियोजनाओं का वित्त पोषण बंद करने का आह्वान किया।

‘स्टॉप जापान्स डर्टी एनर्जी प्लान्स’ विरोध-प्रदर्शन सीओपी30 के दौरान ऊर्जा पर केंद्रित दो विषयगत दिनों के पहले दिन हुआ।

विरोध-प्रदर्शन के आयोजकों ने कहा कि यह निवेश जापान के लिए अस्वीकार्य है, जो अक्सर खुद को एशिया में कार्बन डाइऑक्साइड सहित अन्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में अग्रणी बताता है।

विरोध-प्रदर्शन में शामिल ‘फ्रेंड्स ऑफ द अर्थ जापान’ के हिरोकी ओसादा ने कहा कि “जापान वास्तव में पूरे एशिया में जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की प्रक्रिया में देरी कर रहा है”, क्योंकि वह थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और फिलीपीन जैसे देशों में ऊर्जा परियोजनाओं, मुख्य रूप से तरलीकृत प्राकृतिक गैस के उत्पादन से जुड़ी परियोजनाओं को वित्त पोषित कर रहा है।

ओसादा ने कहा, “इसके अलावा, ‘ग्लोबल साउथ’ के हमारे साथियों के लिए बेलेम में अपनी चिंताओं को व्यक्त करना बहुत अहम है, ताकि वे वास्तव में जापान सरकार से इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाने की मांग कर सकें।”

‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है, जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित या अविकसित के रूप में जाना जाता है। ये देश मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।

फिलीपीन स्थित अनुसंधान संगठन ‘सेंटर फॉर एनर्जी, इकोलॉजी एंड डेवलपमेंट’ के साल 2025 के एक अध्ययन के मुताबिक, सरकारी स्वामित्व वाले ‘जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन’ ने 2016 से 2024 तक कोयला परियोजनाओं के लिए 6.4 अरब अमेरिकी डॉलर और गैस परियोजनाओं के लिए 87.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर का ऋण दिया।

हालांकि, जापान के लिए विदेशी सहायता उपलब्ध कराने के प्रमुख माध्यम इस बैंक ने उक्त आंकड़ों के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है।

एपी पारुल माधव

माधव