जलवायु संकट से निपटने में एआई और अक्षय ऊर्जा की भूमिका पर चर्चा

जलवायु संकट से निपटने में एआई और अक्षय ऊर्जा की भूमिका पर चर्चा

जलवायु संकट से निपटने में एआई और अक्षय ऊर्जा की भूमिका पर चर्चा
Modified Date: September 22, 2026 / 10:08 am IST
Published Date: September 22, 2026 10:08 am IST

न्यूयॉर्क, 22 सितंबर (एपी) वैज्ञानिकों के पृथ्वी के लगातार बिगड़ते स्वास्थ्य का आकलन करने के बीच दुनिया भर के नेताओं ने सोमवार को इसे जल्द सुधारने के उपायों पर एक सप्ताह तक चलने वाली वार्ता की शुरुआत की और इस दौरान अक्षय ऊर्जा के तेजी से विस्तार को उम्मीद की किरण के रूप में देखा गया।

वार्ता में इस बात पर भी चर्चा होगी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उसके लिए बड़ी मात्रा में बिजली एवं पानी की खपत करने वाले डेटा केंद्रों का बढ़ता विस्तार जलवायु संकट को बढ़ाने के साथ-साथ उसके समाधान में भी मदद कर सकता है।

हर साल संयुक्त राष्ट्र महासभा और न्यूयॉर्क जलवायु सप्ताह के दौरान वैश्विक तापमान वृद्धि पर चर्चा होती है, लेकिन कार्रवाई अपेक्षाकृत कम होती है।

विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार एआई और डेटा केंद्रों का बढ़ता प्रभाव तथा ईरान और यूक्रेन में युद्धों के कारण जीवाश्म ईंधन की बढ़ती कीमतें चर्चा का रुख बदल सकती हैं। इसके अलावा, एशिया में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाएं भी अधिक विनाशकारी होती जा रही हैं।

जर्मनी के ‘पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च’ के निदेशक जोहान रॉकस्ट्रॉम ने कहा, ‘‘पृथ्वी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है।’’

उन्होंने चेतावनी दी कि मानव गतिविधियां पृथ्वी की स्थिरता, लचीलेपन और जीवन-समर्थन प्रणालियों को जोखिम में डाल रही हैं।

संस्थान की ‘प्लैनटरी बाउंड्रीज साइंस लैब’ की नई रिपोर्ट के अनुसार, स्वस्थ पृथ्वी के लिए निर्धारित नौ में से सात ‘प्लैनेटरी बाउंड्रीज’ (पृथ्वी की सुरक्षित पर्यावरणीय सीमाएं) पार हो चुकी हैं।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा की ओर बदलाव को ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता’’ बताया।

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने कहा कि जलवायु परिवर्तन खाद्य कीमतों और महंगाई को बढ़ा रहा है तथा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता दुनिया भर में अरबों लोगों को प्रभावित कर रही है।

विशेषज्ञों ने एआई को लेकर दोहरे रुख की बात कही। एक ओर डेटा केंद्रों और एआई की भारी ऊर्जा खपत प्रदूषण बढ़ा सकती है, वहीं दूसरी ओर एआई मानवता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और जलवायु परिवर्तन में मदद कर सकता है।

इस बीच, अक्षय ऊर्जा क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद विशेषज्ञों ने कहा कि 2030 तक वैश्विक अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गति और बढ़ानी होगी। 2025 में दुनिया भर में 693 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई, लेकिन इसी दौरान जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल में भी वृद्धि हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार, अक्षय ऊर्जा से बिजली की बढ़ती मांग पूरी हो रही है, लेकिन तेल, कोयले और गैस के इस्तेमाल में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है, जो जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जरूरी है।

एपी गोला राजकुमार

राजकुमार


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