Dubai Airport Drone Attack/Image Source: ANI
दुबई: Dubai Airport Drone Attack: दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास बुधवार को हुए दो ईरानी ड्रोन हमलों में चार लोग घायल हो गए, हालांकि उड़ानों का संचालन जारी रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। दुबई मीडिया कार्यालय ने सरकार की ओर से जारी बयान में कहा कि हमले में घाना के दो, बांग्लादेश व भारत के एक-एक नागरिक को मामूली चोटें आई हैं।
Dubai Airport Drone Attack: उसने कहा कि हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन सामान्य रूप से जारी है। दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के लिए दुनिया का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। संघर्ष के दौरान इस हवाई अड्डे को कई बार निशाना बनाए जाने के बावजूद अधिकारी उड़ानों का संचालन जारी रखने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने कहा है कि पश्चिम एशिया में अब बैंक और वित्तीय संस्थान उसके निशाने पर हैं।
Authorities confirm that two drones fell in the vicinity of Dubai International Airport (DXB) a short while ago, resulting in minor injuries to two Ghanaian nationals and one Bangladeshi national, and moderate injuries to one Indian national. Air traffic is operating as normal.
— Dubai Media Office (@DXBMediaOffice) March 11, 2026
Dubai Airport Drone Attack: इजराइल ने कहा है कि ईरान ने 10 दिन से जारी युद्ध के दौरान क्लस्टर बम का लगातार इस्तेमाल किया है। ईरान के इस कदम से इजराइल की हवाई सुरक्षा के लिए एक जटिल और घातक चुनौती खड़ी हो गई है। क्लस्टर बम ऊंचाई पर फट जाता है और इससे कई छोटे-छोटे बम (बॉम्बलेट) निकल कर बड़े हिस्से में फैल जाते हैं। ये छोटे बम रात के समय नारंगी रंग के आग के गोले जैसे दिखाई देते हैं और इन्हें हवा में रोकना या इसका पता लगा पाना काफी मुश्किल होता है। ये क्लस्टर बम घातक साबित हुए हैं।
इजराइल, ईरान के हमलों और उनसे हुए नुकसान की जानकारी आम तौर पर सार्वजनिक नहीं करता लेकिन इजराइली अधिकारियों ने हाल में जनता को इन हथियारों के खतरों के बारे में जागरुक करने का प्रयास किया है। ये बम जमीन पर बिना फटे भी पड़े रह सकते हैं और बाद में कभी भी फट सकते हैं। मंगलवार को मध्य इजरायल में एक निर्माण स्थल पर दो लोगों सहित कम से कम तीन लोग मारे गए। क्लस्टर बम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है और 120 से अधिक देशों ने इसका इस्तेमाल नहीं करने संबंधी एक अंतरराष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं लेकिन इजराइल, अमेरिका और ईरान ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस हथियार का इस्तेमाल पूर्व में भी संघर्षों के दौरान होता रहा है, जिसमें 2006 में ईरान समर्थित लेबनानी चरमपंथी समूह हिज़्बुल्ला के खिलाफ इज़राइल की लड़ाई भी शामिल है।