ऑस्ट्रेलिया में एच5एन1 बर्ड फ्लू के पहले मामले की पुष्टि, इसका क्या मतलब है?

ऑस्ट्रेलिया में एच5एन1 बर्ड फ्लू के पहले मामले की पुष्टि, इसका क्या मतलब है?

ऑस्ट्रेलिया में एच5एन1 बर्ड फ्लू के पहले मामले की पुष्टि, इसका क्या मतलब है?
Modified Date: June 21, 2026 / 05:44 pm IST
Published Date: June 21, 2026 5:44 pm IST

(मार्सेल क्लासेन, डीकिन विश्वविद्यालय; मेगन डिवर, फेडरेशन यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया; मिशेल विले, मेलबर्न विश्वविद्यालय)

मेलबर्न, 21 जून (द कन्वरसेशन) अंटार्कटिक क्षेत्रों में पाए जाने वाले समुद्री पक्षी ‘ब्राउन स्कुआ’ में शनिवार को घातक एच5 बर्ड फ्लू के संदिग्ध मामले की ऑस्ट्रेलिया में पुष्टि की गई। एच5 बर्ड फ्लू को एवियन इन्फ्लूएंजा (एचपीएआई) एच5एन1 भी कहा जाता है।

यह विशाल समुद्री पक्षी पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पर्थ से लगभग 700 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व स्थित एस्परेंस के निकट केप ले ग्रैंड नेशनल पार्क में पाया गया था।

इस वायरस के उसी क्षेत्र में पाए गए एक अन्य समुद्री पक्षी पेट्रेल को भी प्रभावित करने का संदेह है।

प्रारंभिक परीक्षण के बाद, इन पक्षियों से एकत्र किए गए नमूनों को सीएसआईआरओ को भेजा गया ताकि एच5एन1 के पहले ऑस्ट्रेलियाई मामलों, विशेष रूप से क्लेड 2.3.4.4बी एच5एन1 की पुष्टि की जा सके।

इस वायरस ने अन्य महाद्वीपों में वन्यजीव आबादी को तबाह कर दिया है, और यह ऑस्ट्रेलिया में पक्षियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक लंबे प्रयास की शुरुआत हो सकता है।

यह वायरस कहां से आया है?

एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस, जिनमें एचपीएआई एच5एन1 केवल एक प्रकार है, हजारों वर्षों से मौजूद हैं। ज्यादातर मामलों में ये पक्षियों में कोई बीमारी नहीं फैलाते।

हालांकि, 1996 में इन वायरस में से एक ने संक्रमण का रूप ले लिया और तब से यह एचपीएआई एच5एन1 मुर्गीपालन के लिए खतरा बना हुआ है।

एचपीएआई एच5एन1 का प्रतिकूल प्रभाव केवल मुर्गीपालन तक सीमित नहीं है। वर्ष 2021 से, एचपीएआई एच5एन1 ने एक वैश्विक पशु महामारी का रूप ले लिया है, जिससे सभी महाद्वीपों में वन्यजीवों पर भारी प्रभाव पड़ा है।

इससे लाखों जंगली पक्षियों की मौत हुई है और कुछ प्रजातियों की वैश्विक आबादी में भारी गिरावट आई है। यह जंगली और पालतू स्तनधारियों में भी फैल चुका है।

यह कैसे फैलता है?

एचपीएआई एच5एन1 को नियंत्रित करने में एक चुनौती यह है कि यह कई तरह के संचरण मार्गों से फैल सकता है। उदाहरण के लिए, यह वायरस आमतौर पर मल के माध्यम से फैलता है, विशेष रूप से जब वह पानी में मौजूद हो। कल्पना कीजिए कि एक तालाब में संक्रमित बत्तख हैं, जहां तालाब का पानी एक माध्यम के रूप में काम करता है और भोजन करने या खुद को साफ करने वाली अन्य बत्तखों को संक्रमित कर देता है।

यह सीधे हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों के माध्यम से भी फैल सकता है, विशेषकर पोल्ट्री फार्म में।

महत्वपूर्ण रूप से, एचपीएआई एच5एन1 से संक्रमित होने पर बत्तखों में बीमारी के लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं, और ऐसा लगता है कि वे संक्रमित होने के बावजूद भी प्रवास जारी रख सकती हैं, जिससे वे संभवतः वायरस को लंबी दूरी तक फैला सकती हैं।

कुल मिलाकर, यह वायरस जंगली पक्षियों के लिए अत्यंत विनाशकारी रहा है। वर्ष 2022 में एचपीएआई एच5एन1 के कारण लगभग 33–47 प्रतिशत ‘उत्तरी गैनेट’ समुद्री पक्षियों की मौत हो गई थी।

इसके ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा?

हालाँकि यह 1990 के दशक से एशिया में और 2024 से अंटार्कटिका में मौजूद रहा है, एचपीएआई एच5एन1 अब तक ऑस्ट्रेलिया में नहीं पाया गया है। इसका कारण संभवतः यह है कि ऑस्ट्रेलिया और एशिया के बीच नियमित रूप से प्रवास करने वाली बत्तखों की कोई प्रजाति नहीं है, और न ही ऐसी बत्तख हैं जो अंटार्कटिका के रास्ते प्रवास करती हों।

अंटार्कटिका में बत्तखों की कमी के बावजूद, यह वायरस 2023–24 की गर्मियों में वहां पहुंच गया और इसके बाद 2024–25 की गर्मियों में उप-अंटार्कटिक क्षेत्र में हजारों किलोमीटर तक फैल गया।

उपलब्ध साक्ष्य से पता चलता है कि अंटार्कटिका और उप-अंटार्कटिक क्षेत्रों में सीगल, स्कुआ और जाइंट पेट्रेल जैसे पक्षियों ने संभवतः लंबी दूरी तक वायरस ले जाने वाले वाहकों की भूमिका निभाई है।

इसके प्रसार को रोकने का प्रयास करें।

एक बार बत्तखों में पहुंच जाने पर, वायरस के फैलने की आशंका तेजी से बढ़ जाती है, और स्थिति गंभीर हो सकती है।

किसानों या मुर्गीपालन करने वाले लोगों के लिए यह आवश्यक है कि वे सरकारी विभागों द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें और संदिग्ध मौत के किसी भी मामले की सूचना दें।

(द कन्वरसेशन)

देवेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल


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